₹60 की NCERT किताब ₹1000 में! टेंडर की गड़बड़ी, घटिया कागज़ और ब्लैक मार्केट ने बढ़ाई छात्रों की मुश्किलें

देशभर में NCERT की नई किताबों की कमी ने लाखों छात्रों और अभिभावकों को परेशानी में डाल दिया। इस संकट के पीछे सप्लाई चेन की गड़बड़ी, टेंडर प्रक्रिया में कथित लापरवाही, प्रिंटिंग में देरी और ब्लैक मार्केटिंग जैसे कई कारण सामने आए हैं।जांच में पता चला कि करीब 13,000–20,000 टन कागज़ की जरूरत वाले प्रोजेक्ट के लिए एक ऐसे सप्लायर को बड़ा ठेका दिया गया, जिसकी क्षमता पर सवाल उठे।

रिपोर्ट के मुताबिक सप्लायर लगभग 4,500 टन कागज़ ही उपलब्ध करा सका, जिससे शुरुआत में ही भारी कमी पैदा हो गई। आरोप है कि टेंडर देने से पहले उसकी उत्पादन क्षमता और वित्तीय योग्यता का पर्याप्त सत्यापन नहीं किया गया।

समस्या यहीं नहीं रुकी। गुणवत्ता जांच के बाद NCERT ने 100 से अधिक प्रिंटिंग एजेंसियों को पैनल से बाहर कर दिया, जिससे स्वीकृत प्रिंटरों की संख्या घटकर करीब 15 रह गई। इतने कम प्रिंटरों पर 10 से 15 करोड़ किताबें छापने की जिम्मेदारी आने से कक्षा 4, 5, 7, 8, 9 और 10 की किताबों की छपाई और आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई।

देरी का फायदा उठाकर बाजार में नकली और निजी तौर पर छपी किताबों की बिक्री बढ़ गई। ₹60–₹200 में मिलने वाली NCERT की किताबें कई जगह ₹800–₹1000 तक बेची गईं। कई छात्रों को घटिया गुणवत्ता वाले कम GSM कागज़, हल्की बाइंडिंग और स्याही फैलने वाली किताबें मिलीं।

पुलिस और NCERT की संयुक्त कार्रवाई में 11 लाख से अधिक नकली किताबें जब्त की गईं और 29 FIR दर्ज की गईं।इस पूरे मामले में शिक्षा मंत्रालय ने टेंडर प्रक्रिया, सप्लायर चयन और खरीद व्यवस्था की जांच के आदेश दिए हैं।

साथ ही छात्रों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए e-Pathshala और DIKSHA पोर्टल पर सभी किताबों के PDF मुफ्त उपलब्ध कराए गए। हालांकि ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए डिजिटल विकल्प भी पूरी तरह कारगर साबित नहीं हुए।

विवाद तब और बढ़ गया जब डिफॉल्टर सप्लायर को ब्लैकलिस्ट करने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में NCERT की ओर से कोई अधिकारी पेश नहीं हुआ।

अदालत ने ब्लैकलिस्टिंग पर रोक लगा दी और सप्लायर की ₹6 करोड़ की बैंक गारंटी पर भी कार्रवाई रोक दी। इसके बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए और जिम्मेदारी तय करने की बात कही।

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