उन्होंने आरोप लगाया कि चीन ने कुछ पारंपरिक पेट्रोलिंग क्षेत्रों में भारतीय सैनिकों की आवाजाही रोक दी है। इतना ही नहीं, उन्होंने दावा किया कि उन्हें प्रधानमंत्री कार्यालय के भीतर से जानकारी मिल रही है और वहां सीमा विवाद को लेकर “अंदरूनी विद्रोह” जैसी स्थिति है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
राहुल ने मीडिया को लेकर भी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया। उनका दावा था कि प्रधानमंत्री मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह मीडिया एडिटर्स को फोन कर चीन से जुड़े सीमा विवाद की खबरें रोकने की कोशिश करते हैं। सरकार की ओर से इन आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है।
इसके बाद राहुल का निशाना सीधे अमित शाह पर गया। संसद में उनकी मौजूदगी को लेकर उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि “कहां गायब हो गए तथाकथित चाणक्य?” राहुल ने आरोप लगाया कि गृह मंत्री करीब 20 दिनों तक सदन में दिखाई नहीं दिए और अब सत्र खत्म होने के वक्त चर्चा की पेशकश कर रहे हैं।फिर आया वो बयान जिसने पूरे भाषण को सोशल मीडिया कंटेंट बना दिया।
राहुल गांधी ने दावा किया कि लगातार विपक्ष के दबाव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी “रात में सो नहीं पा रहे हैं” और कहा कि जब तक मोदी इस्तीफा नहीं देते और अमित शाह पद नहीं छोड़ते, विपक्ष उन्हें “जगाए रखेगा।”विदेश नीति पर भी राहुल ने सरकार को घेरा। ईरान-अमेरिका तनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पास अमेरिका, ईरान और रूस जैसे देशों के साथ संबंध होने के कारण मध्यस्थ की भूमिका निभाने का बड़ा मौका था, लेकिन भारत उस अवसर का फायदा नहीं उठा सका। उन्होंने पाकिस्तान के मध्यस्थता प्रयासों का जिक्र करते हुए सरकार पर तंज कसा और प्रधानमंत्री की विदेश नीति को “हग डिप्लोमेसी” तक सीमित करने की कोशिश का आरोप लगाया।
अपने भाषण में राहुल ने BJP और RSS की विचारधारा पर भी तीखा हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि RSS अब सामाजिक संगठन की भूमिका से आगे बढ़कर बड़े कॉरपोरेट हितों का साधन बन गया है और अडानी-अंबानी का नाम लेते हुए सरकार पर कॉरपोरेट प्रभाव के आरोप लगाए। उन्होंने BJP-RSS पर आधुनिक भारत की सोच को न समझने का भी आरोप लगाया।राहुल ने Jantar Mantar पर हुए छात्र प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए कहा कि युवा अपनी बात रखना चाहते हैं, लेकिन सरकार “व्यवस्था” के नाम पर उनकी आवाज दबा रही है।
उन्होंने इसे भारत में अभिव्यक्ति की आजादी और सत्ता के बीच संघर्ष के रूप में पेश किया।मंच पर माहौल उस वक्त और हल्का हो गया जब राहुल ने प्रधानमंत्री की “हग डिप्लोमेसी” पर तंज कसते हुए रचनात्मक कांग्रेस प्रमुख संदीप दीक्षित को ही गले लगा लिया। सियासत के बीच आया यह moment सोशल मीडिया के लिए किसी ready-made meme से कम नहीं था।राहुल के भाषण के तुरंत बाद BJP ने पलटवार किया। वरिष्ठ BJP नेता रविशंकर प्रसाद ने राहुल पर अहंकार, अनुशासनहीनता और गैर-जिम्मेदाराना राजनीति के आरोप लगाए और कहा कि विपक्ष के हंगामे के कारण संसद का महत्वपूर्ण समय बर्बाद हुआ।
BJP ने राहुल के चीन और PMO से जुड़े दावों को भी खारिज करते हुए उन्हें बिना आधार का राजनीतिक बयान बताया।झारखंड में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी BJP ने राहुल को घेरा। पार्टी नेताओं ने सवाल किया कि अगर राहुल वास्तव में छात्र आंदोलन को लेकर गंभीर हैं, तो दिल्ली में बयान देने के बजाय झारखंड जाकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आवास के बाहर धरना क्यों नहीं देते।यानी संसद का आखिरी दिन खत्म हुआ, लेकिन सियासी “final episode” में भी कोई शांति नहीं आई। राहुल गांधी ने चीन से लेकर छात्रों तक सरकार को घेरा, BJP ने पलटवार किया और सोशल मीडिया को मिला एक और पूरा दिन-quotes, memes और political reels के नाम।
संसद के मानसून सत्र के आखिरी दिन राहुल गांधी ने दिल्ली में ‘रचनात्मक कांग्रेस’ के राष्ट्रीय अधिवेशन में सरकार पर ऐसा हमला बोला कि मंच से लेकर सोशल मीडिया तक सियासी तापमान बढ़ गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, RSS, चीन बॉर्डर और भारत की विदेश नीति-राहुल ने लगभग हर बड़े मुद्दे पर सरकार को घेरा।राहुल गांधी ने सबसे पहले अरुणाचल प्रदेश में LAC पर भारतीय सेना की पेट्रोलिंग को लेकर गंभीर दावा किया।
