कोचिंग से घर लौट रहे दो नाबालिग, रास्ते में घेरकर ‘माफी’ मंगवाई और वीडियो बना दिया-जमुई केस में 5 गिरफ्तारियों के बाद भी बड़े सवाल

बिहार के जमुई में 19 सितंबर की शाम कोचिंग से लौट रहे कक्षा 10 के दो नाबालिग छात्रों के साथ हुई कथित बदसलूकी का वीडियो सामने आने के बाद मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया। जमुई-लखीसराय रोड के पास एक जगह पर युवकों के समूह ने दोनों को कथित तौर पर रोक लिया। वीडियो में दोनों को घेरकर पूछताछ करने, लड़के के साथ मारपीट करने और लड़की के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए देखा जा सकता है। दोनों नाबालिगों को छोड़ने की गुहार लगाते भी दिखाई देते हैं। घटना की कई वीडियो क्लिप बाद में सोशल मीडिया पर सामने आईं।

पुलिस के मुताबिक घटना शाम करीब 7 बजे हुई थी। शुरुआत में पीड़ितों या उनके परिवार की ओर से शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। 21 सितंबर को वीडियो वायरल होने के बाद जमुई पुलिस ने स्वतः संज्ञान लिया और वीडियो में दिखाई दे रहे वाहन के registration number की मदद से दोनों छात्रों तक पहुंची। इसके बाद POCSO Act और Bharatiya Nyaya Sanhita की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने वीडियो की जांच के आधार पर करीब सात लोगों की पहचान की और SDPO Deepti Monali के नेतृत्व में Special Investigation Team बनाई।

मामले में कार्रवाई लगातार आगे बढ़ी। शुरुआती चरण में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। 22 सितंबर को पुलिस ने मुख्य आरोपी बताए जा रहे Nandan Yadav समेत दो और लोगों को पकड़ा। पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान Nandan Yadav ने भागने की कोशिश की और पुलिस कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। इसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। इस तरह पांच गिरफ्तारियां हो चुकी थीं, जबकि पुलिस ने सात लोगों की पहचान की थी।

मामले में National Commission for Women ने भी स्वतः संज्ञान लिया। NCW अध्यक्ष Vijaya Rahatkar ने बिहार के DGP से आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी, समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच तथा पीड़ितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। आयोग ने सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो से जुड़े कदमों पर भी ध्यान देने को कहा, क्योंकि पीड़ितों की पहचान और गरिमा की सुरक्षा इस मामले का अहम हिस्सा है।

घटना ने राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज कर दी। विपक्षी नेताओं ने इसे कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार पर सवाल उठाए। Rahul Gandhi ने घटना को “deeply disturbing” बताते हुए POCSO के तहत कार्रवाई की मांग की। वहीं अन्य विपक्षी नेताओं ने भी कथित moral policing और सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। सरकार की ओर से पुलिस कार्रवाई और आरोपियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही गई है। इन राजनीतिक दावों और आरोपों का अंतिम आकलन जांच के परिणाम के बाद ही किया जा सकेगा।

जमुई की यह घटना सिर्फ एक वायरल वीडियो की कहानी नहीं है। यह सवाल भी सामने रखती है कि क्या किसी नागरिक, खासकर नाबालिग छात्र-छात्राओं से सार्वजनिक जगह पर इस तरह पूछताछ या जबरन रोकने का अधिकार किसी निजी समूह को हो सकता है। कानून-व्यवस्था का काम नागरिकों की सुरक्षा और अपराध की जांच करना है, न कि भीड़ को अपने स्तर पर ‘सजा’ तय करने देना। साथ ही, इस मामले में वीडियो का वायरल होना पीड़ितों के लिए दूसरी तरह का नुकसान भी पैदा कर सकता है।

इसलिए आरोपियों पर कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ितों की privacy, psychological support और डिजिटल प्लेटफॉर्म से आपत्तिजनक सामग्री हटाने की प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
जांच अभी जारी है और आरोपियों के खिलाफ आरोप अदालत में साबित होना बाकी है। लेकिन जमुई की यह घटना एक बड़ा सवाल छोड़ती है-सार्वजनिक रास्ते पर सुरक्षा का भरोसा कानून देगा या फिर कोई भीड़ खुद को कानून समझने लगेगी?

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