एक सवाल ने बदली सोच, आवाज से ब्रेल छापने वाली हिमजा ने जीता ₹6 लाख का James Dyson Award

आंध्र प्रदेश के एलूरु जिले की 20 वर्षीय इंजीनियरिंग छात्रा लिंगमपल्ली हिमजा ने ऐसा इनोवेशन तैयार किया है, जो दृष्टिबाधित लोगों के लिए ब्रेल लिखने की प्रक्रिया को आसान बनाने की कोशिश करता है। हिमजा ने ‘RUDHRA’ नाम का वॉयस-इनेबल्ड ब्रेल प्रिंटिंग सिस्टम बनाया है, जो बोले गए शब्दों को ब्रेल में बदलकर कागज पर उभार के रूप में प्रिंट करता है। उनके इस प्रोजेक्ट को 2026 के James Dyson Award के भारत के नेशनल विनर के रूप में चुना गया है और उन्हें करीब ₹6 लाख की पुरस्कार राशि मिली है। अब वह अंतरराष्ट्रीय चरण में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगी।

हिमजा Shri Vishnu Engineering College for Women में Electrical and Electronics Engineering की छात्रा हैं। RUDHRA का विचार एक दृष्टिबाधित छात्रों के स्कूल के दौरे के दौरान आया। वहां उन्होंने देखा कि बच्चे पारंपरिक स्लेट और स्टाइलस की मदद से ब्रेल लिखते हैं। इसमें उन्हें कागज पर बार-बार दबाव डालना पड़ता है और ब्रेल को सही दिशा में लिखने के लिए उल्टे पैटर्न को समझना भी जरूरी होता है। लगातार ऐसा करने से उंगलियों पर दबाव पड़ने की समस्या भी सामने आई।

शुरुआत में हिमजा ने छह बटन वाला ब्रेल प्रिंटर तैयार किया था। इसके जरिए यूजर मैन्युअली ब्रेल इनपुट देता था और मशीन कागज पर उल्टी दिशा में डॉट्स पंच करती थी। इसी प्रोटोटाइप को देखने के बाद एक दृष्टिबाधित छात्र ने सवाल किया कि जब बोलकर इनपुट दिया जा सकता है तो बटन दबाने की जरूरत क्यों हो। यही सवाल RUDHRA के मौजूदा वॉयस सिस्टम की वजह बना।

RUDHRA में Alexa का इस्तेमाल आवाज को टेक्स्ट में बदलने के लिए किया जाता है। इसके बाद Raspberry Pi उस टेक्स्ट को ब्रेल पैटर्न में बदलता है। मशीन फिर कागज के पीछे से डॉट्स को पंच करती है, ताकि कागज पलटने के बाद ब्रेल सही दिशा में पढ़ा जा सके। प्रोजेक्ट की आधिकारिक James Dyson Award प्रोफाइल के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य दृष्टिबाधित लोगों को ब्रेल दस्तावेज स्वतंत्र रूप से तैयार करने में मदद करना है।

इस प्रोजेक्ट को तैयार करते समय हिमजा के सामने ब्रेल डॉट्स की सटीक दूरी और मशीन की पंचिंग व्यवस्था जैसी तकनीकी चुनौतियां भी आईं। अलग-अलग प्रोटोटाइप और सोलोनॉयड व्यवस्था के जरिए उन्होंने मशीन की सटीकता को बेहतर किया। अब उनकी योजना RUDHRA को और छोटा, हल्का और ज्यादा स्वचालित बनाने की है। भविष्य में ऑटोमैटिक पेपर फीडिंग और AI आधारित सहायता जोड़ने पर भी काम करने की योजना है।

James Dyson Award जीतना इस प्रोजेक्ट के लिए अगला कदम है, अंतिम मंजिल नहीं। अंतरराष्ट्रीय चरण में RUDHRA का मूल्यांकन होगा और हिमजा का लक्ष्य इसे स्कूलों, परीक्षा केंद्रों और घरों में इस्तेमाल होने वाला अधिक सुलभ ब्रेल प्रिंटर बनाना है। एक छात्र के छोटे से सवाल से शुरू हुआ यह विचार अब भारत के छात्र इनोवेशन को अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जा रहा है।

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