तेलंगाना के सूर्यापेट जिले में रविवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसे में 50 वर्षीय न्यूरोसर्जन डॉ. Kasakurthi Jagadish की मौत हो गई। Mamata Hospital, Khammam से जुड़े डॉ. Jagadish अपनी Volvo कार से Khammam से Hyderabad की ओर जा रहे थे। करीब सुबह 7:15 बजे Pillalamarri के पास NH-365BB पर उनकी कार अचानक नियंत्रण से बाहर हुई और सड़क किनारे लगे डिवाइडर से जा टकराई। टक्कर के कुछ ही सेकंड बाद वाहन में आग लग गई और देखते ही देखते पूरा केबिन आग की चपेट में आ गया। डॉक्टर कार के अंदर फंसे रह गए और उनकी जलने से मौत हो गई। हादसे के बाद वाहन पूरी तरह जलकर लगभग ढांचे में बदल गया।
घटना की CCTV फुटेज में कार को तेज लेन से अचानक बाईं ओरजाते और कई लेन पार करने के बाद डिवाइडर से टकराते देखा गया। इसके तुरंत बाद वाहन आग की लपटों में घिर गया। पुलिस की शुरुआती जांच में आशंका जताई गई है कि डॉ. Jagadish को नींद या अत्यधिक थकान के कारण झपकी आई हो सकती है, जिससे वाहन पर नियंत्रण खो गया। हालांकि यह अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं है और पुलिस दुर्घटना के दूसरे संभावित कारणों की भी जांच कर रही है।
हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती मृतक की पहचान की थी। आग इतनी भीषण थी कि शव की तत्काल पहचान नहीं हो सकी। पुलिस ने पास के toll plaza से मिली जानकारी और वाहन के temporary registration number की मदद से मृतक की पहचान Dr. Kasakurthi Jagadish के रूप में की। वह Mamata Hospital में neurosurgeon थे और वहां Neurosurgery विभाग से जुड़े वरिष्ठ चिकित्सक के रूप में कार्यरत थे। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए Suryapet Government General Hospital भेजा गया। फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं।
इस हादसे ने एक गंभीर लेकिन अक्सर नजरअंदाज किए जाने वाले सवाल को फिर सामने ला दिया है-क्या लंबे कामकाजी घंटों और नींद की कमी के बाद डॉक्टरों या दूसरे high-responsibility professionals के लंबी दूरी तक वाहन चलाने को लेकर पर्याप्त fatigue-management व्यवस्था है? इस मामले में पुलिस ने फिलहाल दबी हुई नींद को संभावित वजह माना है, इसलिए इसे स्थापित तथ्य के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
दूसरा सवाल दुर्घटना के बाद वाहन की आग और occupant safety से जुड़ा है। टक्कर के बाद आग इतनी तेजी से फैली कि डॉक्टर वाहन से बाहर नहीं निकल सके। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में यह स्थापित नहीं हुआ है कि आग का कारण किसी विशेष mechanical या electrical failure से जुड़ा था। ऐसे मामलों में crashworthiness, emergency door release, fire suppression और सड़क किनारे लगाए गए barriers की डिजाइन जैसे पहलुओं की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।
डॉ. Jagadish की मौत ने Khammam के medical fraternity में भी शोक की लहर पैदा की है। एक वरिष्ठ neurosurgeon का इस तरह अचानक चले जाना सिर्फ एक परिवार की क्षति नहीं बल्कि उस healthcare system के लिए भी बड़ा नुकसान है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यह हादसा सड़क सुरक्षा के साथ-साथ healthcare professionals की fatigue, सुरक्षित commuting और दुर्घटना के बाद तत्काल rescue व्यवस्था पर भी गंभीर चर्चा की जरूरत सामने रखता है।
