चार सीटें, तीन ABVP के नाम फिर भी DUSU की सबसे बड़ी कहानी कौन ले गया?

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ यानी DUSU चुनाव 2026 का नतीजा सिर्फ चार पदों के विजेताओं की कहानी नहीं है। केंद्रीय पैनल की तीन सीटें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के खाते में गईं, लेकिन उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन की जीत ने चुनाव की पूरी तस्वीर में एक अलग अध्याय जोड़ दिया। वहीं, कांग्रेस से संबद्ध NSUI चारों केंद्रीय पदों में से कोई भी सीट नहीं जीत सकी।

अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास ने 24,576 वोट हासिल कर NSUI के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोटों से हराया। सचिव पद पर रिया छावड़ी को 21,650 वोट मिले, जबकि संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने 16,615 वोट हासिल किए। उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय दीपांशु शौकीन 30,615 वोटों के साथ विजयी रहे। उपलब्ध नतीजों के अनुसार वह चारों विजेताओं में सबसे ज्यादा वोट पाने वाले उम्मीदवार रहे।

शौकीन की जीत इसलिए भी चर्चा में रही क्योंकि वह पहले NSUI से जुड़े थे और टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरे। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने पैदल और कई मौकों पर नंगे पैर छात्रों के बीच जाकर अभियान चलाया। उनकी जीत ने DUSU के केंद्रीय पैनल में लंबे अंतराल के बाद एक निर्दलीय उम्मीदवार की वापसी कराई।

इस चुनाव में छात्र सुरक्षा और रहने की सुविधाएं भी बड़े मुद्दे बने। सितंबर में सत्य निकेतन में एक निजी छात्रावास की इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें पांच छात्र शामिल थे। इसके बाद हॉस्टल और PG की सुरक्षा चुनावी चर्चा के केंद्र में आ गई। नवनिर्वाचित अध्यक्ष यश डबास ने भी कॉलेज हॉस्टल और PG में सुरक्षा ऑडिट को अपनी शुरुआती प्राथमिकताओं में बताया है।
वोटिंग में भी छात्रों की भागीदारी पिछले वर्षों की तुलना में बढ़ी। 52 मतदान केंद्रों पर कुल 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो पिछले तीन वर्षों में सबसे अधिक था। छात्रों ने चुनाव के दौरान आवास, सुरक्षित कैंपस और किफायती सार्वजनिक परिवहन जैसी समस्याओं को प्रमुख मुद्दों में शामिल किया।

एक और आंकड़ा ध्यान खींचता है-चार केंद्रीय पदों पर कुल 23,942 NOTA वोट पड़े। सचिव पद पर 7,884 और संयुक्त सचिव पद पर 7,389 NOTA वोट दर्ज हुए। यह आंकड़ा चुनावी मुकाबले के साथ-साथ उन छात्रों की मौजूदगी भी दिखाता है जिन्होंने उपलब्ध उम्मीदवारों में से किसी को चुनने के बजाय NOTA का विकल्प चुना।

चुनाव के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट की निगरानी भी महत्वपूर्ण रही। प्रचार में नियमों के उल्लंघन, सार्वजनिक संपत्ति के इस्तेमाल और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के बीच अदालत ने चुनाव परिणामों के बाद विजय जुलूसों पर रोक लगाने का निर्देश दिया। अदालत ने Lyngdoh Committee की चुनावी गाइडलाइंस के पालन पर भी जोर दिया।

इस तरह DUSU 2026 का परिणाम एक साथ कई तस्वीरें दिखाता है-ABVP ने चार में से तीन केंद्रीय पद जीते, NSUI केंद्रीय पैनल में खाता नहीं खोल सकी, एक निर्दलीय उम्मीदवार ने उपाध्यक्ष पद पर बड़ी जीत दर्ज की और हजारों छात्रों ने NOTA को चुना। अब असली परीक्षा इन नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों के सामने है कि चुनाव के दौरान उठे छात्र आवास, सुरक्षा, परिवहन और कैंपस सुविधाओं जैसे मुद्दे अगले सत्र में किस तरह आगे बढ़ते हैं।

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