कमरे में बज रहा था राधा नाम, CCTV में दिखी आखिरी हलचल… रसिक दुलारी शरण की मौत के पीछे आखिर क्या था?

वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा लेने वाले करीब 25 वर्षीय रसिक दुलारी शरण, जिनका मूल नाम दीपक लोधा/लोधी बताया जा रहा है और जो जबलपुर के रहने वाले थे, की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सितंबर 2026 के अंतिम सप्ताह में राधावाटिका गली स्थित गुरुकृपा कुंज की चार मंजिला इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हुई। शुरुआती जांच में मामला आत्महत्या और आत्म-क्षति से जुड़ा नजर आ रहा है, लेकिन परिवार की ओर से उठाए गए सवालों और घटना से पहले के घटनाक्रम ने जांच को और गंभीर बना दिया है।

दीपक करीब दो साल पहले जबलपुर से वृंदावन आए थे। यहां उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली और रसिक दुलारी शरण नाम अपनाया। बताया जाता है कि वे संत सेवा, भीड़ व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कामों में सहयोग करते थे। साथी साधकों के मुताबिक उनका अधिकांश समय भजन, कीर्तन और सेवा में बीतता था। घटना के समय भी उनके कमरे में मोबाइल से लगातार राधा नाम के भजन बज रहे थे। पुलिस की शुरुआती तलाशी में कोई लिखित सुसाइड नोट मिलने की बात सामने नहीं आई है।

जांच में सामने आए CCTV फुटेज के मुताबिक घटना से कुछ समय पहले रसिक दुलारी कमरे से बाहर निकले। पुलिस के अनुसार वे खून से सने कपड़ों में बाहर दिखाई दिए, कुछ देर परिसर में रहे और फिर चौथी मंजिल की छत पर पहुंचे। कुछ समय वहां रहने के बाद वे नीचे गिर गए। पुलिस और फोरेंसिक टीम अब CCTV फुटेज, घटनास्थल और मेडिकल रिपोर्ट को जोड़कर पूरी टाइमलाइन तैयार कर रही है।

पोस्टमार्टम में मौत की प्राथमिक वजह अत्यधिक रक्तस्राव से हुआ hemorrhagic shock बताई गई है। रिपोर्ट में सिर, पसलियों और फेफड़े में गंभीर चोटों का भी उल्लेख है। शरीर पर घटना से पहले और गिरने के बाद हुई चोटों के बीच अंतर समझने के लिए मेडिकल और फोरेंसिक जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि घटना से पहले रसिक दुलारी ने खुद को इतनी गंभीर चोट क्यों पहुंचाई। पुलिस फिलहाल किसी एक कारण को अंतिम निष्कर्ष नहीं मान रही है। मोबाइल फोन को FSL भेजा गया है और डिलीट की गई चैट, कॉल रिकॉर्ड, फोटो या वीडियो सहित डिजिटल डेटा की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मौत से पहले उन्होंने किसी व्यक्ति से संपर्क किया था या कोई संदेश छोड़ा था।

परिजनों ने जांच पर सवाल उठाते हुए बताया कि दीक्षा लेने के बाद दीपक का परिवार से संपर्क काफी कम हो गया था। उनका आरोप है कि वृंदावन आने के बाद वे पहले की जिंदगी से लगभग पूरी तरह दूर हो गए थे और परिवार को उनसे खुलकर मिलने में भी परेशानी होती थी। परिवार ने मामले को केवल आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए निष्पक्ष जांच और जरूरत पड़ने पर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

घटना की सूचना पुलिस को दिए जाने में कथित देरी को लेकर भी परिवार ने सवाल उठाए हैं। पुलिस अब यह जांच रही है कि घटना के बाद कमरे में कौन मौजूद था, घायल अवस्था में दीपक को अस्पताल ले जाने में कितना समय लगा और पुलिस को सूचना कब और किस परिस्थिति में दी गई। उनके साथ रहने वाले साधक युगल नेही शरण से भी पूछताछ की गई है। उनके अनुसार वे सुबह अपनी सेवा के लिए निकल गए थे और घटना के समय रसिक दुलारी कमरे में अकेले थे।

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसमें एक तरफ पुलिस और फोरेंसिक जांच आत्महत्या और आत्म-क्षति की दिशा में आगे बढ़ रही है, जबकि दूसरी तरफ परिवार घटना की परिस्थितियों को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। फिलहाल किसी बाहरी व्यक्ति की भूमिका या साजिश को साबित करने वाला तथ्य सामने नहीं आया है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष पुलिस की जांच, FSL रिपोर्ट, CCTV, कॉल डिटेल्स और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही निकलेगा।

रसिक दुलारी शरण की मौत ने एक और गंभीर सवाल सामने रखा है-क्या आध्यात्मिक जीवन में पूरी तरह डूब जाने वाले व्यक्ति के भीतर चल रहे मानसिक संघर्ष को समय रहते पहचाना जा सकता है? इस सवाल का जवाब केवल इस केस की जांच से नहीं, बल्कि ऐसे सभी मामलों में मानसिक स्वास्थ्य, पारिवारिक संवाद और समय पर सहायता की व्यवस्था से भी जुड़ा है। अभी जांच जारी है और आने वाली फोरेंसिक तथा डिजिटल रिपोर्ट इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर को और स्पष्ट कर सकती है।

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