घूमने निकले थे 48 बच्चे… लौटे सिर्फ 40, Diveagar का समुद्र 8 परिवारों से छीन ले गया उनके लाल

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के Diveagar Beach पर 1 अक्टूबर की शाम एक educational excursion देखते ही देखते ऐसी त्रासदी में बदल गया, जिसने पुणे के Alandi में मातम पसरा दिया। Winners Academy से घूमने निकले 48 लोगों के समूह में शामिल आठ किशोर छात्रों की समुद्र में डूबने से मौत हो गई। मृतकों में Class XI और XII के छात्र थे। समूह में 25 लड़के, 17 लड़कियां और छह शिक्षक शामिल थे, जो करीब 170 किलोमीटर का सफर तय कर Diveagar पहुंचे थे।

बताया गया कि छात्र शाम करीब 5:30 बजे समुद्र किनारे पहुंचे थे। कुछ छात्र पानी के पास चले गए, लेकिन अचानक तेज लहरों और undertow current ने स्थिति बिगाड़ दी। छात्र एक ऐसे हिस्से में पहुंच गए जहां पानी के नीचे की रेत और बदलती गहराई को समझ पाना मुश्किल था। देखते ही देखते कई छात्र तेज बहाव में फंसकर गहरे पानी की ओर खिंच गए। चीख-पुकार सुनकर स्थानीय मछुआरे और Mahakali Water Sports की टीम तुरंत मदद के लिए पानी में उतरी। निजी jet skis के जरिए भी छात्रों को बाहर निकालने की कोशिश की गई, लेकिन तेज करंट ने rescue operation को बेहद मुश्किल बना दिया।

इस हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों की पहचान Tanmay Dattatray Vahile, Sumit Bharat Ahire, Pranav Ramdas Bansode, Kaivalya Satish Wasankar, Rajveer Yuvraj Vahile, Yash Kiran Wankhede, Soham Tukaram Bhandwalkar और Kaustubh Sandeep Daund के रूप में हुई। सभी शवों को समुद्र से निकालने के बाद Borli Panchatan Primary Health Centre ले जाया गया, जहां जरूरी कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम किया गया।

हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल अब समुद्र की लहरों से ज्यादा बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहा है। क्या excursion से पहले मौसम और समुद्र की स्थिति की जानकारी ली गई थी? क्या बच्चों को पानी के पास जाने से रोकने के लिए पर्याप्त निगरानी थी? क्या certified lifeguards या जरूरी safety equipment मौजूद था? इन सवालों के जवाब अब जांच का हिस्सा हैं। पुलिस ने Dighi Coastal Police Station के तहत Accidental Death Report दर्ज कर मामले की जांच शुरू की है और संभावित लापरवाही के पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

वहीं, Winners Academy के संचालन और लाइसेंस से जुड़े दस्तावेजों की भी प्रशासनिक जांच शुरू हुई है। स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई ने private coaching institutes की student-safety व्यवस्था पर भी बहस छेड़ दी है।

अगर किसी संस्था की जिम्मेदारी बच्चों को सुरक्षित तरीके से excursion पर ले जाने की है, तो केवल parental consent लेना ही काफी है या फिर formal safety clearance, पर्याप्त supervision और emergency preparedness भी अनिवार्य होनी चाहिए-यह सवाल अब पूरे सिस्टम के सामने है।

हादसे के बाद Alandi में शोक का माहौल रहा और स्थानीय लोगों ने बंद रखकर मृत छात्रों को श्रद्धांजलि दी। परिवारों का दर्द इस बात से और बढ़ गया कि जिन बच्चों को वे एक सुरक्षित educational outing के लिए भेज रहे थे, वही सफर उनके लिए आखिरी सफर बन गया।

Diveagar की यह घटना सिर्फ आठ छात्रों की मौत की कहानी नहीं है। यह उस जिम्मेदारी की याद दिलाती है जो किसी भी संस्था पर बच्चों को घर से बाहर ले जाते समय होती है। समुद्र की लहरों का अंदाजा हमेशा नहीं लगाया जा सकता, लेकिन बच्चों की सुरक्षा की तैयारी जरूर की जा सकती है।

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