मुजफ्फरनगर की जेल परिसर में स्थित 186 साल पुरानी मस्जिद में अब मुस्लिमों को नमाज अदा करने से रोका जा रहा है। जेल प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया गया है, लेकिन स्थानीय मुसलमान इसे धार्मिक भेदभाव मान रहे हैं।
यूपी के मुजफ्फरनगर से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मुजफ्फरनगर की जेल परिसर में स्थित एक पुरानी मस्जिद में मुस्लिमों को नमाज पढ़ने से रोक दिया गया है। यह मस्जिद अंग्रेजों के जमाने से यहां मौजूद है और करीब 186 साल पुरानी है। मस्जिद के पास एक मंदिर भी है, जो भी इसी समय के आसपास बना था।
स्थानीय मुसलमानों का कहना है कि वे पिछले सौ सालों से यहां नमाज पढ़ते आ रहे हैं, लेकिन अब जेल प्रशासन ने मस्जिद में ‘नो एंट्री’ की व्यवस्था लागू कर दी है। जेल प्रशासन का कहना है कि यह सुरक्षा कारणों से किया गया है, क्योंकि जेल परिसर एक संवेदनशील इलाका है।
स्थानीय निवासी मोहम्मद रफी और मोहम्मद फबी खान ने आरोप लगाया है कि जेलर ने उन्हें बदतमीजी से पेश आते हुए सलाखों के पीछे भेजने की धमकी दी और नमाज अदा करने से रोका। जेल अधीक्षक ने मीडिया को बताया कि ये सभी आरोप बेबुनियाद हैं और सुरक्षा की दृष्टि से बाहरी लोगों को अंदर आने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
