महाराष्ट्र में कमर्शियल ऑटो, टैक्सी और ऐप-कैब ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा के नियम को लेकर मुंबई समेत कई इलाकों में विरोध और अफरातफरी देखने को मिली। विवाद उस समय बढ़ा जब RTO की जांच शुरू हुई और सोशल मीडिया पर ₹5,000 से ₹25,000 तक के तत्काल जुर्माने की खबरें वायरल होने लगीं।
हालांकि, सरकार के अनुसार नियम का उद्देश्य ड्राइवरों को मराठी का विद्वान बनाना नहीं, बल्कि यात्रियों से बुनियादी कामकाजी संवाद सुनिश्चित करना है। नियम के तहत यदि ड्राइवर बेसिक मराठी समझने या बोलने में असमर्थ पाया जाता है, तो उसे पहले एक महीने का समय सीखने के लिए दिया जाना है। इसके बाद भी अनुपालन न होने पर बैज/लाइसेंस को तीन महीने के लिए निलंबित किया जा सकता है और लगातार उल्लंघन पर आगे कार्रवाई संभव है।
RTO अभियान के दौरान राज्य में 9,233 कमर्शियल पैसेंजर वाहन चालकों की जांच की गई, जिनमें 1,499 ड्राइवर बेसिक मराठी समझाने में असफल रहे और उन्हें शो-कॉज नोटिस दिए गए।इस बीच कांदिवली, मलाड, गोरेगांव, दहिसर और अन्य इलाकों में ड्राइवरों ने विरोध किया। कई जगह रूट रोके गए और यात्रियों को वाहनों से उतारने की शिकायतें भी सामने आईं। कुछ यूनियनों ने तीन दिन की हड़ताल की चेतावनी दी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि ड्राइवरों को साहित्यिक मराठी नहीं, केवल रोजमर्रा के काम के लिए जरूरी भाषा सीखनी है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी अधिकारियों को चेतावनी दी कि 30 दिन की निर्धारित अवधि से पहले अवैध जुर्माना लगाने वाले RTO कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी।
विवाद अब भाषा, रोजगार और महाराष्ट्र में रहने वाले बाहरी राज्यों के कामगारों के अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बड़ी बहस बन चुका है।
