उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को 69000 शिक्षक भर्ती मामले में एक गंभीर झटका लगा है। हाईकोर्ट ने भर्ती की मेरिट सूची को रद्द कर दिया है, जिससे राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर असर पड़ा है। इस भर्ती में आरक्षण को लेकर गड़बड़ी की वजह से 6800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति अटकी हुई है, जो वर्षों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठे थे।
इन अभ्यर्थियों ने अपने हक के लिए निरंतर संघर्ष किया है। कभी बारिश और तेज धूप में धरना प्रदर्शन किया, तो कभी हड्डी कंपा देने वाली ठंड में खुले आसमान के नीचे रातें गुजारीं। बावजूद इसके, उन्हें अभी तक राहत नहीं मिली थी।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के मामले में गड़बड़ी के कारण उनकी नियुक्ति लटक गई। पिछली योगी सरकार में तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने स्वीकार किया था कि आरक्षण में गड़बड़ी हुई है और शेष बचे अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की बात कही थी, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
वर्तमान में, 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण की गड़बड़ी के कारण 6800 अभ्यर्थियों की नियुक्ति अब भी लटकी हुई है। इनमें 5800 ओबीसी, 1100 एससी और 100 दिव्यांग अभ्यर्थी शामिल हैं। हाईकोर्ट के हालिया निर्णय ने अभ्यर्थियों को राहत की उम्मीद प्रदान की है और उनकी नियुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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