सीतापुर जेल में बंद समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आज़म खान को कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता उल्लंघन के मामले में फैसला सुनाते हुए आज़म खान को बरी कर दिया है।
हालांकि इस मामले में बरी होने के बावजूद आज़म खान जेल से बाहर नहीं आ सकेंगे, क्योंकि उनके खिलाफ अभी अन्य कई मामले अदालतों में लंबित हैं।
आज़म खान पर आरोप था कि 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान वह राजा डिग्री कॉलेज मतदान केंद्र पर अपने वाहन से पहुंचे थे, जो कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार मतदान केंद्र के 200 मीटर के भीतर प्रतिबंधित था। इसी आधार पर तत्कालीन रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, जो कि रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में विचाराधीन था। आज इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आज़म खान को बरी कर दिया।
इस संबंध में आज़म खान के वकील मोहम्मद मुरसलीन ने बताया, “2019 में लोकसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन एसडीएम पी.पी. तिवारी द्वारा आज़म खान के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि वह वोट डालने के लिए अपनी गाड़ी लेकर वोटिंग कैंपस के अंदर आए थे। इस मामले में चार्जशीट दाखिल की गई थी, और कोर्ट में ट्रायल चला। लेकिन, पांच गवाहों के बावजूद प्रॉसीक्यूशन यह साबित करने में नाकाम रहा कि आरोप सही थे। कोर्ट ने इसे झूठा मुकदमा मानते हुए आज़म खान को बरी कर दिया है। यह मामला आईपीसी की धारा 171 एफ और आरपी एक्ट की धारा 133 के तहत दर्ज किया गया था।”
अब जबकि इस मामले में कोर्ट ने फैसला सुना दिया है, आज़म खान को राहत तो मिली है, लेकिन अन्य लंबित मामलों के कारण उनकी रिहाई अभी संभव नहीं हो सकी है।
