Delhi CM Arvind Kejriwal

क्या कल जेल से रिहा होंगे दिल्ली के CM केजरीवाल?

नई दिल्ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से जुड़ा शराब घोटाला मामले में कल का दिन बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है, जब सुप्रीम कोर्ट इस मामले में अपना फैसला सुनाएगा। यह मामला दिल्ली सरकार द्वारा 2021 में लागू की गई नई शराब नीति और उससे जुड़े कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है, जिसने देशभर में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। केजरीवाल पर आरोप हैं कि इस नई नीति के तहत शराब ठेकों के आवंटन में अनियमितता और घोटाला हुआ, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा और निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया।

मामला क्या है?

2021 में दिल्ली सरकार ने शराब बिक्री को लेकर नई नीति लागू की थी, जिसके तहत निजी खिलाड़ियों को शराब की दुकानों के लाइसेंस दिए गए थे। इस नीति का मकसद था कि दिल्ली में शराब की बिक्री को अधिक पारदर्शी और नियंत्रित तरीके से संचालित किया जाए। लेकिन कुछ ही समय बाद आरोप लगे कि इस नीति के तहत शराब लाइसेंस देने में भ्रष्टाचार और घोटाले की बातें सामने आई हैं। आरोप यह भी है कि ठेकों के आवंटन में नियमों का पालन नहीं किया गया और कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया।

इस घोटाले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का नाम सामने आया, और कहा गया कि उनके नेतृत्व में यह अनियमितताएं हुईं। इसी मामले की जांच के तहत उन्हें हिरासत में लिया गया, और तब से इस पूरे घटनाक्रम पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

अब, सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कल यानी 13 सितंबर को अपना अहम फैसला सुनाने वाली है। केजरीवाल की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की गई है, जिसमें उन्होंने कहा है कि उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध के कारण फंसाया गया है और उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। उनके वकील ने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री के तौर पर उनके सभी फैसले पूरी तरह से पारदर्शी और कानूनी रूप से उचित थे।

दूसरी ओर, जांच एजेंसियों ने दावा किया है कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं कि इस घोटाले में केजरीवाल की भूमिका अहम थी। एजेंसियों का कहना है कि इस नीति से दिल्ली सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हुआ, जबकि कुछ निजी कंपनियों को इसका सीधा लाभ मिला।

राजनीतिक मोर्चा

इस मामले ने दिल्ली की राजनीति में भी भूचाल ला दिया है। आम आदमी पार्टी (AAP) और विपक्षी दलों के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है। AAP का दावा है कि यह मामला राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा है, जिसका मकसद केजरीवाल की छवि को धूमिल करना है और उनकी सरकार को अस्थिर करना है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि केजरीवाल के खिलाफ कार्रवाई केंद्र सरकार द्वारा राजनीतिक प्रतिशोध के तहत की जा रही है।

वहीं, भाजपा और कांग्रेस जैसे विपक्षी दल इस मामले में दिल्ली सरकार पर हमलावर हैं। भाजपा ने केजरीवाल पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह घोटाला आम आदमी पार्टी के ‘ईमानदार राजनीति’ के दावों की पोल खोलता है। कांग्रेस भी इस मुद्दे पर आक्रामक रही है और उसने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है।

कल का दिन क्यों है महत्वपूर्ण?

कल सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए जाने वाला फैसला न केवल केजरीवाल की राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करेगा, बल्कि दिल्ली की राजनीति पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा। यदि केजरीवाल को जमानत मिल जाती है, तो यह उनके और उनकी पार्टी के लिए बड़ी राहत होगी। लेकिन अगर कोर्ट उनके खिलाफ फैसला सुनाता है और उन्हें जेल में ही रहना पड़ता है, तो यह आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।

देशभर की निगाहें अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं, जो इस विवादित शराब नीति और उससे जुड़े घोटाले पर अंतिम रूप से मुहर लगाएगा।

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