उत्तर कर्नाटक के यादगीर जिले में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक गांव में स्वर्ण जाति के लोगों ने दलित परिवारों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया है। मामला एक सवर्ण जाति के लड़के के खिलाफ बलात्कार का केस दर्ज कराने का है। नाबालिग दलित लड़की के माता-पिता की ओर से दर्ज मामले के बाद युवक को गिरफ्तार कर लिया गया था। उस पर दलित लड़की के माता-पिता पर केस वापस लेने के लिए दबाव डाला गया लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया।
इन जगह जानें पर लगाई रोक
सवर्ण जाति के लड़के के खिलाफ केस दर्ज कराने के चलते न सिर्फ उनका बल्कि इलाके के सभी दलितों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। पीडि़ता के पिता का आरोप है कि बहिष्कार के बाद 250 दलितों को किराने और स्टेशनरी की दुकानों, मंदिरों, सैलून और सार्वजनिक स्थानों पर जाने से रोक दिया गया है। दलित बच्चे पेन और नोटबुक जैसी चीजें तक नहीं खरीद पा रहे हैं। हालांकि जिला पुलिस अधीक्षक जी. संगीता का कहना है कि मैंने गांव में शांति बैठक की। बहिष्कार की कोई घटना नजर नहीं आई है। दोनों समुदायों के बीच गलतफहमी थी। हमने दोनों समुदायों को बुलाकर बातचीत की है। उन्होंने अपनी गलतियों को सुधारकर एक-दूसरे के साथ मिलकर रहने की बात कही है।
गर्भवती हुई तो किया शादी से इनकार
सूत्रों ने बताया कि आरोपी ने नाबालिग लड़की से शादी का वादा कर संबंध बनाए थे। 15 वर्षीय लड़की पांच माह की गर्भवती हो गई। इसके बाद परिवार को इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद युवक ने लड़की के साथ किसी भी तरह से संबंध से इनकार कर दिया। लड़की के परिवार ने लड़के से शादी करने के लिए कहा, तो लड़के के परिवार ने मना कर दिया। इस पर लड़की के माता-पिता ने नारायणपुरा पुलिस स्टेशन में पॉक्सो के तहत मामला दर्ज कराया।
