INDIA गठबंधन में दरार या नई शुरुआत? DMK-AAP की दूरी, ममता-केजरीवाल मुलाकात और 2026 की पूरी कहानी

INDIA (Indian National Developmental Inclusive Alliance) गठबंधन का गठन 2023 में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA के खिलाफ एक संयुक्त विपक्षी मोर्चा बनाने के लिए किया गया था। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (SP), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), शिवसेना (UBT), NCP (SP), वाम दलों समेत कई विपक्षी दल इस गठबंधन में शामिल हुए। इसका उद्देश्य विपक्षी वोटों को एकजुट करना, सीटों के बंटवारे में तालमेल बैठाना और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा को चुनौती देना था।


2024 लोकसभा चुनाव में INDIA गठबंधन ने 230 से अधिक सीटें जीतकर एक मजबूत विपक्ष के रूप में अपनी पहचान बनाई। हालांकि सत्ता NDA के पास रही, लेकिन विपक्ष पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत होकर उभरा। इसके बाद गठबंधन ने संसद के अंदर और बाहर महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा प्रबंधन, चुनावी प्रक्रिया और विभिन्न सरकारी नीतियों पर सरकार को घेरने की कोशिश की।
लेकिन 2026 गठबंधन के लिए चुनौतीपूर्ण वर्ष साबित हुआ। तमिलनाडु की राजनीति में बदलाव के बाद DMK और कांग्रेस के रिश्तों में तनाव बढ़ा और DMK ने INDIA गठबंधन से दूरी बना ली। वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) ने भी सार्वजनिक रूप से खुद को गठबंधन से अलग कर लिया।


इसी बीच 7 जून 2026 को ममता बनर्जी ने दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की, जिसके बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं। 8 जून को दिल्ली के संविधान क्लब में INDIA गठबंधन की बड़ी बैठक हुई, जिसमें राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, सुप्रिया सुले और कई अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य गठबंधन को फिर से सक्रिय करना और आंतरिक मतभेदों को कम करना था।


बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा प्रबंधन में कथित अव्यवस्था और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दे उठाए तथा विपक्षी दलों से एकजुट रहने की अपील की।


हालांकि गठबंधन के भीतर चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। DMK की दूरी, AAP का अलग होना, TMC के भीतर असंतोष की खबरें और क्षेत्रीय दलों की अपनी-अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं INDIA गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े कर रही हैं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि गठबंधन की संसदीय ताकत पहले की तुलना में काफी कम हो सकती है।


फिर भी कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी, RJD, शिवसेना (UBT), NCP (SP), नेशनल कॉन्फ्रेंस और वाम दल अभी भी साझा मंच पर दिखाई दे रहे हैं और 2029 के राजनीतिक मुकाबले को ध्यान में रखते हुए समन्वय बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।


निष्कर्ष
INDIA गठबंधन आज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां उसके सामने दो रास्ते हैं-या तो वह अपने मतभेदों को पीछे छोड़कर एक मजबूत विपक्षी मोर्चा बना रहे, या फिर क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं और अंदरूनी संघर्ष उसे एक ढीले-ढाले समन्वय मंच में बदल दें। 2026 की घटनाएं यह दिखाती हैं कि गठबंधन अभी जीवित है, सक्रिय है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी परीक्षा अब विपक्षी एकता को बचाए रखने की है।

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