NEET-UG पेपर लीक मामले में जांच लगातार नए मोड़ ले रही है और अब इसमें एक बड़ा खुलासा सामने आया है। शुरुआत में यह मामला केवल कुछ प्रश्नपत्रों के वायरल होने तक सीमित माना जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, यह एक संगठित और अंतरराज्यीय नेटवर्क के रूप में सामने आने लगा। इस पूरे मामले ने देश की परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
CBI की जांच में सामने आया है कि इस रैकेट में केवल बाहरी लोग ही नहीं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ अंदरूनी लोग भी शामिल थे। सबसे बड़ा खुलासा यह है कि एक ट्रांसलेटर, जो प्रश्नपत्र के अनुवाद और प्रोसेसिंग कार्य से जुड़ा था, ने अपनी पहुंच का गलत इस्तेमाल किया। आरोप है कि उसने गोपनीय प्रश्नों की जानकारी लीक कर आगे इस नेटवर्क तक पहुंचाई।
इसके बाद यह जानकारी अलग-अलग कोचिंग नेटवर्क और दलालों के जरिए छात्रों तक “गेस पेपर” के नाम पर बेची गई। कई जगहों पर इस अवैध सौदे में लाखों रुपये की डील होने की बात भी सामने आई है।
CBI ने इस मामले में ट्रांसलेटर समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से मोबाइल फोन, डिजिटल डिवाइस और महत्वपूर्ण सबूत बरामद किए हैं। पूछताछ में पूरे नेटवर्क की परतें खुल रही हैं, जिससे यह साफ हो रहा है कि यह कोई सामान्य लीक नहीं बल्कि एक संगठित पेपर माफिया सिस्टम था।अब जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क को ट्रैक कर रही हैं और अन्य राज्यों में भी छापेमारी जारी है।
