दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP (Cockroach Janta Party) के नेतृत्व में चल रहे छात्र आंदोलन और ‘संसद चलो’ मार्च ने केवल छात्रों और अभिभावकों को ही नहीं, बल्कि देश के कई बड़े डिजिटल क्रिएटर्स, स्वतंत्र पत्रकारों, NEET-JEE शिक्षकों, कलाकारों और छात्र संगठनों को भी एक मंच पर ला दिया। कई लोगों ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और चोटों के बावजूद मैदान नहीं छोड़ा और लगातार छात्रों की आवाज़ को देशभर तक पहुँचाया।
स्वतंत्र पत्रकारों ने दिखाई जमीनी हकीकत
स्वतंत्र पत्रकार सार्थक गोस्वामी (The Sunday Show) सबसे पहले घटनास्थल पर पहुँचने वालों में शामिल रहे। लाठीचार्ज के दौरान छात्रों को बचाने की कोशिश में उनके कंधे पर पुलिस की लाठी लगी, लेकिन उन्होंने कैमरा बंद नहीं किया। घायल छात्रों के इंटरव्यू और ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए उन्होंने पूरे घटनाक्रम को सोशल मीडिया पर लाखों लोगों तक पहुँचाया।
KK Create ने पुलिस बैरिकेड्स, आंसू गैस और जंतर-मंतर की स्थिति पर विस्तृत डॉक्यूमेंट्री शैली की रिपोर्टिंग की। वहीं शुभंकर मिश्रा ने मौके से लाइव पॉडकास्ट और इंटरव्यू कर छात्र नेताओं, कानूनी टीमों और सोनम वांगचुक जैसे प्रमुख चेहरों को अपनी बात रखने का मंच दिया।
वरिष्ठ पत्रकार अजीत अंजुम और दीपक शर्मा ने भी पैदल मार्च के साथ चलते हुए विस्तृत ग्राउंड रिपोर्ट तैयार की। श्याम मीरा सिंह देर रात तक अस्पतालों और प्रदर्शन स्थल से लगातार लाइव रिपोर्टिंग करते रहे। वहीं Newslaundry, DW Hindi और अन्य स्वतंत्र मीडिया संस्थानों की टीमें भी पूरे घटनाक्रम को कवर करती रहीं। झड़पों में कई फोटो जर्नलिस्टों के कैमरे और उपकरण भी क्षतिग्रस्त हुए।
जब शिक्षक क्लासरूम छोड़ छात्रों के बीच पहुँचे
ऑनलाइन शिक्षा जगत के कई बड़े शिक्षक भी आंदोलन में शामिल हुए। Physics Wallah के MR Sir (मनीष राज) ने पानी की बौछार और भगदड़ के दौरान छात्रों की सुरक्षा के लिए मानव श्रृंखला बनाई तथा घायल छात्रों को मेडिकल कैंप और सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने में मदद की। बाद में उन्होंने मंच से भी छात्रों को संबोधित किया।
प्रतीक जैन (Pratik Bhaiya) ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए मेडिकल सहायता, भोजन और कानूनी हेल्पलाइन की जानकारी लगातार साझा की। अभिनय शर्मा (Abhinay Sir) ने मंच से प्रशासनिक जवाबदेही की मांग उठाई और घायल छात्रों की आर्थिक मदद का भी ऐलान किया। NV Sir (नितिन विजय) सहित कोटा और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के कई शिक्षकों ने भी छात्रों का मनोबल बढ़ाया और राहत कार्यों में सहयोग दिया।
रैप, कविता और संस्कृति बनी आंदोलन की आवाज़
दिल्ली-एनसीआर के कई स्वतंत्र रैप कलाकार और हिप-हॉप क्रिएटर्स पुलिस बैरिकेड्स के सामने ही गीत, कविता और स्ट्रीट परफॉर्मेंस के जरिए छात्रों का हौसला बढ़ाते रहे।उनके गीतों में पेपर लीक, युवाओं के भविष्य और रोजगार जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
स्टैंड-अप कॉमेडियन और व्यंग्यकार कुणाल कामरा सहित कई डिजिटल क्रिएटर्स ने सोशल मीडिया पर आंदोलन का समर्थन किया, राहत कार्यों के लिए फंड जुटाए और लगातार लोगों से छात्रों के साथ खड़े होने की अपील की।
11 साल बाद खून से हुआ ‘Face Reveal’
आंदोलन के सबसे चर्चित पलों में से एक रहा PeeingHuman के नाम से प्रसिद्ध रमित वर्मा का फेस रिवील। संसद मार्च के दौरान पुलिस लाठी लगने से उनके सिर और जबड़े पर गंभीर चोट लगी। खून से लथपथ अवस्था में उन्होंने वीडियो जारी करते हुए कहा, “11 साल बाद ऐसा फेस रिवील होगा, कभी नहीं सोचा था… लेकिन यह इसके लायक था।” प्राथमिक उपचार के बाद वे दोबारा जंतर-मंतर लौटे और रिपोर्टिंग जारी रखी।
छात्र नेताओं और संगठनों की अहम भूमिका
छात्र नेता नेहा बोरा ने पुलिस द्वारा मंच हटाने की कार्रवाई के बाद CJP संस्थापक अभिजीत डिपके के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। उन्होंने अस्पताल में भर्ती छात्रों के इलाज और कानूनी सहायता मिलने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही।
वहीं आइशे घोष तथा AISA, SFI, NSUI सहित विभिन्न छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मानव श्रृंखला बनाकर छोटे छात्रों को लाठीचार्ज से बचाने की कोशिश की और कई नेताओं ने स्वयं लाठियों का सामना किया।
छोटे शहरों के क्रिएटर्स भी बने आंदोलन का हिस्सा
बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और अन्य राज्यों से आए दर्जनों क्षेत्रीय यूट्यूबर और व्लॉगर्स अपने खर्च पर दिल्ली पहुँचे। भीड़ और धक्का-मुक्की में कई लोग घायल भी हुए, लेकिन उन्होंने लगातार स्थानीय भाषाओं में वीडियो बनाकर छोटे शहरों तक आंदोलन की जानकारी पहुँचाई।
आंदोलन की सबसे बड़ी तस्वी
रइस आंदोलन की सबसे खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में पत्रकार, शिक्षक, कलाकार, यूट्यूबर और छात्र नेता केवल समर्थन जताने नहीं आए, बल्कि मैदान में छात्रों के साथ डटे रहे। किसी ने घायलों को अस्पताल पहुँचाया, किसी ने मेडिकल कैंप और राहत सामग्री जुटाई, किसी ने कानूनी सहायता उपलब्ध कराई, तो किसी ने अपनी डिजिटल पहुँच के माध्यम से आंदोलन की हर छोटी-बड़ी जानकारी देश और दुनिया तक पहुँचाई।
यही कारण है कि जंतर-मंतर का यह आंदोलन केवल एक छात्र प्रदर्शन नहीं, बल्कि देशभर के अलग-अलग वर्गों की एकजुटता का प्रतीक बन गया।
