जंतर-मंतर पर CJP आंदोलन का छठा दिन: छात्रों, किसानों और शिक्षकों की एकजुट आवाज से गरमाई दिल्ली

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा CJP (Cockroach Janta Party) का आंदोलन अब अपने छठे दिन में प्रवेश कर चुका है और धीरे-धीरे एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है। NEET-UG पेपर लीक, परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू हुआ यह धरना अब देशभर के छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

आंदोलन के संस्थापक अभिजीत डिपके ने किसानों से समर्थन की अपील की, जिसके बाद कई किसान संगठनों ने भी एकजुटता दिखाई। वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने भी आंदोलन स्थल पर पहुंचकर समर्थन दिया और चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो वह 27 जून से अनशन शुरू कर सकते हैं।

आंदोलन की एक खास बात इसकी सामाजिक और धार्मिक एकता रही है। सिख स्वयंसेवकों द्वारा लंगर चलाया जा रहा है, जबकि विभिन्न समुदायों के लोग पानी, भोजन और अन्य जरूरी सामान पहुंचाकर प्रदर्शनकारियों की मदद कर रहे हैं। कई छात्रों और समर्थकों का दावा है कि दिल्ली की भीषण गर्मी के बीच आम नागरिकों का सहयोग आंदोलन को मजबूती दे रहा है।

दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया है कि धरना समाप्त करवाने के लिए प्रशासन द्वारा कुछ सुविधाओं पर अस्थायी रोक लगाई गई और मदद पहुंचाने वाले लोगों से पहचान संबंधी जानकारी मांगी गई, जबकि पुलिस और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहे हैं।

आंदोलन के दौरान “थाली-चम्मच” प्रदर्शन, “डायपर डोनेशन ड्राइव” और कॉकरोच मास्क जैसे प्रतीकों ने भी सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा बटोरी है। समर्थकों का कहना है कि यह केवल किसी एक संगठन का आंदोलन नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहे युवाओं की आवाज है, जबकि आलोचक इसके तरीकों और राजनीतिक प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं।

जैसे-जैसे आंदोलन अपने पहले सप्ताह की ओर बढ़ रहा है, यह राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, परीक्षा प्रणाली और सरकारी जवाबदेही को लेकर एक बड़ी बहस का केंद्र बनता जा रहा है।

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