2026 में भारत के नागरिक तकनीक क्षेत्र में एक अनोखी पहल चर्चा में है – Project Sadak, जिसे दिल्ली के 15 वर्षीय छात्र पार्थ पुरी ने विकसित किया है। यह सिर्फ एक टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि एक व्यक्तिगत दर्द से जन्मी सामाजिक क्रांति की कहानी है।इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2023 में हुई, जब पार्थ ने अपने माता-पिता को एक गंभीर सड़क हादसे में घायल होते देखा।
यह दुर्घटना दिल्ली की एक खराब और अनमैप्ड सड़क पर गहरे गड्ढे के कारण हुई थी। इस घटना ने उन्हें झकझोर दिया और उन्होंने समझा कि भारत में सड़क सुरक्षा केवल एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि एक गंभीर जनसमस्या है।पार्थ ने पाया कि हर साल हजारों सड़क दुर्घटनाएं केवल खराब सड़कों और समय पर मरम्मत न होने की वजह से होती हैं।
मौजूदा शिकायत प्रणालियाँ धीमी, जटिल और अक्सर अनदेखी का शिकार होती हैं। इसी समस्या को हल करने के लिए उन्होंने अपनी कोडिंग और AI स्किल्स का उपयोग करते हुए Project Sadak तैयार किया।जनवरी 2026 में लॉन्च हुआ यह प्लेटफॉर्म आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित है, जो नागरिकों द्वारा भेजी गई शिकायतों को ऑटो-फिल्टर करता है, उनकी गंभीरता का विश्लेषण करता है और संबंधित नगर निकाय तक तुरंत पहुँचाता है। इससे फर्जी शिकायतों में कमी और वास्तविक समस्याओं पर तेज कार्रवाई संभव होती है।
यह सिस्टम सड़क की तस्वीर, लोकेशन डेटा और यूजर रिपोर्ट को एक साथ प्रोसेस करता है, जिससे प्रशासन को रियल-टाइम इनसाइट मिलती है।
Project Sadak आज एक ऐसे डिजिटल समाधान के रूप में देखा जा रहा है जो भारत की शहरी व्यवस्था में पारदर्शिता और तेजी लाने की क्षमता रखता है।
