नई दिल्ली में आयोजित एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस में Arvind Kejriwal ने केंद्र सरकार और खासकर केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah पर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने राम मंदिर और कथित चढ़ावा विवाद को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए इसे चुनावी राजनीति से जोड़ दिया।
केजरीवाल ने अपने संबोधन की शुरुआत एक टाइमलाइन पेश करते हुए की, जिसमें उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद बीते लगभग 891 दिनों में राजनीतिक गतिविधियों में “राम नाम का उपयोग” लगातार बढ़ा है, लेकिन वास्तविक धार्मिक दौरे और आस्था के स्तर पर विरोधाभास दिखाई देता है।
उन्होंने सीधे अमित शाह से पांच सवाल पूछे, जिनमें मुख्य रूप से यह पूछा गया कि वे राम मंदिर दर्शन के लिए क्यों नहीं गए और क्या भगवान राम के प्रति उनकी आस्था केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि धर्म का उपयोग केवल वोट और सत्ता प्राप्त करने के साधन के रूप में किया जा रहा है।
Aam Aadmi Party प्रमुख ने आगे कहा कि अयोध्या में कथित “चढ़ावा चोरी” को लेकर जनता में गहरी नाराज़गी है और यदि ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होती, तो न्याय की उम्मीद कमजोर पड़ती है। उन्होंने स्थानीय बार एसोसिएशन द्वारा कथित बहिष्कार के फैसले का भी समर्थन किया
इसके साथ ही उन्होंने अपनी पार्टी की नीतियों का बचाव करते हुए कहा कि उनकी सरकारें धार्मिक यात्राओं और सांस्कृतिक योजनाओं के माध्यम से आम नागरिकों को धार्मिक स्थलों तक पहुंचाने का काम कर रही हैं।
उन्होंने इसे “धार्मिक आस्था का वास्तविक सम्मान” बताया और विपक्ष पर धर्म के राजनीतिक उपयोग का आरोप दोहराया।कुल मिलाकर, यह प्रेस कॉन्फ्रेंस धार्मिक भावनाओं, राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप के बीच एक नए सियासी विवाद को जन्म देती नजर आई।
