उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के रोहिणी सेक्टर-16 में एक निर्माणाधीन चार मंजिला इमारत के अचानक गिरने से बड़ा हादसा हो गया। मलबे में दबे लोगों को निकालने के लिए रातभर बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें NDRF, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें शामिल रहीं। हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कुछ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
मृतकों में 42 वर्षीय राम किशोर शामिल हैं, जो हादसे के समय अपनी मोटरसाइकिल से इमारत के पास से गुजर रहे थे। अचानक इमारत गिरने की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई। वहीं निर्माण स्थल पर काम कर रहे 24 वर्षीय मजदूर कफे और इमारत मालिक के 62 वर्षीय पति राम दुआ की भी इस हादसे में जान चली गई।रेस्क्यू टीमों ने मलबे के नीचे फंसे एक मजदूर सद्दाम (32) को करीब चार घंटे बाद सुरक्षित बाहर निकाला। उन्हें चोटें आई हैं, लेकिन उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। हादसे में एक अन्य राहगीर भी घायल हुआ है।
प्रारंभिक जांच में नगर निगम दिल्ली (MCD) ने इमारत गिरने के पीछे संरचनात्मक छेड़छाड़ की आशंका जताई है। जांच के अनुसार, निर्माणाधीन भवन में प्लंबिंग का काम चल रहा था और कथित तौर पर बीम व कॉलम जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों में कटिंग की जा रही थी। लोड-बेयरिंग संरचना कमजोर होने से पूरी इमारत कुछ ही सेकंड में ढह गई।
हादसे के बाद दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में निर्माण की गुणवत्ता, इस्तेमाल की गई सामग्री, बिल्डर और ठेकेदार की जिम्मेदारी तथा सुरक्षा मानकों की अनदेखी जैसे पहलुओं को शामिल किया गया है।इस घटना के बाद MCD की SARAL योजना भी सवालों के घेरे में आ गई है। इस योजना के तहत प्रमाणित आर्किटेक्ट के स्व-प्रमाणन के आधार पर निर्माण अनुमति प्रक्रिया को आसान बनाया जाता है।
अब जांच की जा रही है कि क्या इस व्यवस्था का किसी तरह दुरुपयोग हुआ।हादसे के बाद आसपास की इमारतों को खाली कराया गया और पूरे इलाके को सुरक्षा कारणों से सील कर दिया गया।
स्थानीय लोगों ने भी शुरुआती रेस्क्यू में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अपने हाथों से मलबा हटाकर लोगों को बचाने की कोशिश की।यह हादसा एक बार फिर शहरी निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों, निगरानी व्यवस्था और संरचनात्मक नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
