नोएडा के मामूरा में दर्दनाक अग्निकांड: PG बिल्डिंग में लगी भीषण आग, दम घुटने से दो युवाओं की मौत

नोएडा के सेक्टर-66 स्थित मामूरा गांव में बुधवार को एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत में लगी भीषण आग ने दो कामकाजी युवाओं की जान ले ली, जबकि 50 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। शुरुआती जांच के अनुसार, आग की शुरुआत इमारत के ग्राउंड फ्लोर/पार्किंग क्षेत्र में खड़े एक इलेक्ट्रिक स्कूटर से हुई, जिसके बाद आग तेजी से अन्य वाहनों तक फैल गई और पूरी इमारत घने धुएं से भर गई।

जानकारी के मुताबिक, ग्राउंड-प्लस-फोर (G+4) इमारत में करीब 54 कमरे थे, जहां आईटी, बीपीओ और निजी कंपनियों में कार्यरत युवक-युवतियां किराये पर रहते थे। आग लगने के समय इमारत में लगभग 70 से 100 लोग मौजूद थे। धुएं के कारण सीढ़ियां और मुख्य निकास पूरी तरह बंद हो गए, जिससे कई लोग ऊपरी मंजिलों पर फंस गए।

इस हादसे में बिहार की रहने वाली 24 वर्षीय स्नेहा श्रीवास्तव और मध्य प्रदेश के 27 वर्षीय ऋषभ कुमार की दम घुटने से मौत हो गई। दोनों के शव सीढ़ियों के पास मिले, जहां वे बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे। बताया जा रहा है कि स्नेहा ने अंतिम समय में अपने रिश्तेदार को फोन कर मदद की गुहार भी लगाई थी।घटना के बाद स्थानीय लोगों और दमकल विभाग ने संयुक्त रूप से राहत अभियान चलाया।

संकरी गलियों के कारण दमकल की गाड़ियां सीधे इमारत तक नहीं पहुंच सकीं। ऐसे में स्थानीय लोगों ने सामने की निर्माणाधीन इमारत तक बांस और सीढ़ियों की मदद से अस्थायी पुल बनाया, जिसके जरिए कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि इमारत में फायर एक्सटिंग्विशर, स्मोक डिटेक्टर, फायर अलार्म और इमरजेंसी एग्जिट जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाएं मौजूद नहीं थीं। पुलिस ने लापरवाही से मौत का मामला दर्ज करते हुए भवन संचालक को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।

यह हादसा एक बार फिर दिल्ली-एनसीआर के शहरी गांवों में बिना पर्याप्त अग्नि सुरक्षा मानकों के संचालित पीजी और रिहायशी इमारतों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ सुरक्षित चार्जिंग व्यवस्था, नियमित फायर ऑडिट और भवन सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन अब पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।

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