संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन जबरदस्त हंगामे और राजनीतिक टकराव के नाम रहा। INDIA गठबंधन के नेताओं ने काले कपड़े और काली पट्टियां पहनकर संसद के मकर द्वार से लेकर सदन के भीतर तक जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष ने NEET-UG पेपर लीक, छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई और विपक्षी नेताओं की हिरासत को लेकर केंद्र सरकार को घेरा।
राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव, सुप्रिया सुले, महुआ मोइत्रा, महुआ माजी और मल्लिकार्जुन खड़गे समेत कई बड़े नेता विरोध में शामिल हुए। अखिलेश यादव ने काले रंग को छात्रों के भविष्य के लिए “शोक का प्रतीक” बताया और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई।
वहीं प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार कॉरपोरेट कर्ज माफ कर सकती है, लेकिन छात्रों के लिए पेपर लीक नहीं रोक पा रही। खड़गे ने छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई को “तानाशाही” बताया।लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद नारेबाजी करते हुए वेल में पहुंच गए।
विपक्ष ने नियम 267 के तहत सभी काम रोककर पेपर लीक पर विशेष चर्चा, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान की मांग की। जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार NEET और पेपर लीक पर विस्तृत चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन विपक्ष सड़क की राजनीति कर रहा है।
राज्यसभा में जे.पी. नड्डा ने कहा कि CBI जांच जारी है और सरकार हर सवाल का जवाब देगी।सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित होने के बाद राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देशभर में 152 पेपर लीक हुए, जिससे 7.5 करोड़ से अधिक परिवार प्रभावित हुए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बड़े आरोपियों के खिलाफ लगभग कोई सजा नहीं हुई और शिक्षा व्यवस्था को कमजोर किया गया है।
इसी बीच राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करने की वजह भी बताई। राहुल गांधी का दावा था कि लोकसभा अध्यक्ष से विशेष चर्चा की मांग करने पर उन्हें बताया गया कि सरकार की मंजूरी जरूरी है। उनका कहना था कि जब संसद में छात्रों की आवाज नहीं सुनी गई, तब विपक्ष ने प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करने का फैसला लिया।
वहीं अखिलेश यादव ने कहा कि जब संसद में जवाब नहीं मिलता, तो जनता और उसके प्रतिनिधियों को सड़क पर उतरना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध के दौरान विपक्षी नेताओं के साथ धक्का-मुक्की की गई और उन्हें जबरन हिरासत में लिया गया।दिनभर के हंगामे, नारेबाजी और लगातार स्थगन के बाद लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार रोकनी पड़ी।
पेपर लीक और छात्र आंदोलन का मुद्दा अब संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह सियासी टकराव का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।
