दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन और Cockroach Janta Party (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया। सफदरजंग अस्पताल से गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल शिफ्ट किए जाने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने देर रात ICU में सोनम वांगचुक से मुलाकात की।
यह बैठक सरकार और छात्र आंदोलन के बीच संवाद की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने 24 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की और कहा कि उनका जीवन देश के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं वांगचुक ने NEET-UG पेपर लीक, छात्रों की आत्महत्याओं, पुलिस कार्रवाई और दर्ज FIR जैसे मुद्दों को विस्तार से रखा।
सरकार की ओर से छात्रों की आत्महत्या करने वाले परिवारों को उचित मुआवजा देने, संसद में शिक्षा सुधार और जवाबदेही पर चर्चा कराने तथा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही की मांग पर विचार करने का मौखिक आश्वासन दिया गया।
बैठक के बाद सोनम वांगचुक ने सरकार को एक खुला पत्र जारी किया। उन्होंने जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह के अस्पताल आने तथा विभिन्न दलों के 65 से अधिक सांसदों द्वारा स्वास्थ्य की चिंता जताने पर आभार व्यक्त किया।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वे तभी अनशन समाप्त करेंगे जब केंद्र सरकार लिखित रूप में यह गारंटी दे कि जंतर-मंतर आंदोलन में शामिल किसी भी छात्र या युवा प्रदर्शनकारी के खिलाफ FIR, गिरफ्तारी या भविष्य को प्रभावित करने वाली कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
उन्होंने कहा कि छात्रों का एकमात्र “अपराध” एक निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग करना है। वांगचुक ने यह भी कहा कि यदि सरकार यह लिखित आश्वासन देती है तो वे स्वयं छात्रों और CJP से शांतिपूर्ण आंदोलन रोककर संवाद की प्रक्रिया अपनाने की अपील करेंगे।
इधर जेपी नड्डा ने भाजपा मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है और वांगचुक के पत्र का औपचारिक जवाब भी दिया जाएगा। उन्होंने आंदोलन को राजनीति से दूर रखते हुए समाधान निकालने की बात कही।
इस बीच करीब 65 सांसदों के संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने भी वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील की। विपक्ष के लगभग 15 सांसद, जो मेदांता अस्पताल में उन्हें पत्र सौंपने पहुंचे थे, उन्हें शुरुआती दौर में ICU के बाहर पुलिस ने रोक दिया, जिससे नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
वहीं CJP ने साफ किया कि वांगचुक के रुख से अलग उनका आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने अपनी चार गैर-समझौतावादी मांगें दोहराईं – केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजा, सभी FIR वापस लेकर छात्रों पर कार्रवाई समाप्त करना और पेपर लीक रोकने के लिए संसद में तत्काल कानून लाना।
उधर दिल्ली हाईकोर्ट ने भी 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामलों में केंद्र और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए सभी CCTV फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है, ताकि अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा सके।
