NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद ने देशभर में छात्रों का बड़ा आंदोलन खड़ा कर दिया। जंतर-मंतर पर Cockroach Janta Party (CJP) के बैनर तले शुरू हुआ यह आंदोलन 37 दिनों तक चला और 20 जुलाई के ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान पुलिस लाठीचार्ज व झड़पों के बाद राष्ट्रीय मुद्दा बन गया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद देशभर में छात्रों के समर्थन में प्रदर्शन हुए और विपक्ष के कई सांसद भी संसद से बाहर निकलकर उनके साथ खड़े दिखाई दिए।
आंदोलन के दौरान सोनम वांगचुक अनशन पर बैठे, जबकि CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने छात्रों का नेतृत्व किया। इस पूरे आंदोलन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि जहां कई मुख्यधारा के टीवी चैनलों पर आंदोलन को पर्याप्त जगह न देने के आरोप लगे, वहीं डिजिटल क्रिएटर्स, स्वतंत्र पत्रकारों और यूट्यूब चैनलों ने लगातार ग्राउंड रिपोर्टिंग, लाइव कवरेज और छात्रों की आवाज़ देशभर तक पहुंचाई। इससे डिजिटल पत्रकारिता पर लोगों का भरोसा और मजबूत हुआ।
लगातार बढ़ते दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे की खबर मिलते ही जंतर-मंतर पर जश्न का माहौल बन गया। इसी दौरान अभिजीत दीपके का नारा पूरे आंदोलन की पहचान बन गया-“कहा जाता था इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते… झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।” यह नारा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और आंदोलन की सबसे चर्चित पहचान बन गया।
सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद आंदोलन स्थगित किया गया। छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा, परीक्षा प्रणाली में सुधार, पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून, प्रभावित परिवारों के लिए सहायता और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने जैसे मुद्दों पर सरकार ने आगे कार्रवाई का आश्वासन दिया।
यह आंदोलन केवल एक परीक्षा या एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने दिखाया कि लोकतंत्र में संगठित छात्र शक्ति, जनदबाव और डिजिटल मीडिया मिलकर राष्ट्रीय बहस को नई दिशा दे सकते हैं।
