सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव को लेकर राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में स्कूली छात्रों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। राजस्थान के बाड़मेर (रामसर) और जालोर (मेंगलवा) सहित कई सरकारी स्कूलों में छात्रों ने स्कूल के मुख्य द्वारों पर ताला जड़ दिया और सड़कों पर बैठकर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि कई स्कूलों में ग्रेड-1, ग्रेड-2 और ग्रेड-3 के शिक्षकों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, जिससे कई विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके अलावा साफ पीने का पानी, चालू शौचालय, पंखे और बैठने के लिए पर्याप्त बेंच जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। छात्रों के हाथों में तख्तियां थीं और उनका एक ही संदेश था-“हम भीख नहीं मांग रहे, हम शिक्षा का अधिकार मांग रहे हैं।
इसी तरह बिहार के गया जिले में भी सरकारी स्कूल के छात्रों ने शिक्षक कमी, खराब आधारभूत ढांचे और मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर विरोध मार्च निकाला। छात्रों ने स्कूल गेट बंद कर प्रशासनिक अधिकारियों से सीधे मुलाकात की मांग की। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में भी हजारों छात्रों ने भीषण गर्मी, खराब पंखों, आरओ पानी की व्यवस्था न होने और अन्य समस्याओं के विरोध में प्रदर्शन किया।
इन प्रदर्शनों को सोशल मीडिया पर भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने छात्रों के वीडियो साझा करते हुए उनके साहस की सराहना की और कहा कि यदि छोटे बच्चों को भी शिक्षक और पीने का पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है, तो यह सरकारी शिक्षा व्यवस्था के सामने गंभीर सवाल खड़े करता है।
CJP ने भी राज्यों से खाली शिक्षक पदों को जल्द भरने और स्कूलों की बुनियादी सुविधाएं सुधारने की मांग की है।इन घटनाओं ने सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है। छात्रों का कहना है कि जब तक शिक्षकों की नियुक्ति और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
