मध्य प्रदेश में करीब 2,000 किसानों का आंदोलन उस समय सुर्खियों में आ गया, जब संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और कई किसान संगठनों के बैनर तले निकली ‘किसान क्रांति पदयात्रा’ भोपाल-नर्मदापुरम हाईवे तक पहुंच गई।
लगभग 70 किलोमीटर की इस पदयात्रा के दौरान किसानों ने सड़क पर डेरा डाल दिया, जिससे हाईवे पर लंबा जाम लग गया और प्रशासन को ट्रैफिक डायवर्ट करने के साथ कई स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी। देर रात सरकार और किसान नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया गया।
किसानों का सबसे बड़ा मुद्दा ग्रीष्मकालीन मूंग की सरकारी खरीद रहा। उनका कहना है कि सरकार केवल 25% फसल ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद रही थी, जबकि प्रति एकड़ उत्पादन इससे कई गुना अधिक है। किसानों का आरोप है कि बाकी फसल उन्हें खुले बाजार में कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही नए e-VIKAS (e-Token) सिस्टम में तकनीकी दिक्कतों और खाद वितरण में देरी को लेकर भी किसानों ने नाराज़गी जताई।
प्रदर्शन के दौरान किसानों ने पुलिस बैरिकेड्स पार कर दिए और भोपाल की ओर बढ़ने की कोशिश की। पुलिस ने पॉलीटेक्निक चौराहा और होशंगाबाद रोड के आसपास रास्ता रोक दिया, जिसके बाद किसान हाईवे पर धरने पर बैठ गए। रातभर चले इस प्रदर्शन से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ और कई इलाकों में प्रशासन को विशेष व्यवस्था करनी पड़ी।
लगातार बढ़ते दबाव के बीच राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। सरकार ने मूंग खरीद की सीमा 25% से बढ़ाकर 60% करने, स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 10 अगस्त तक बढ़ाने और खरीद प्रक्रिया 20 अगस्त तक जारी रखने का फैसला किया। इसके अलावा किसानों की शिकायतों को देखते हुए e-VIKAS प्रणाली को फिलहाल स्थगित कर पारंपरिक ऑफलाइन व्यवस्था बहाल करने का भी ऐलान किया गया। इन आश्वासनों के बाद किसान संगठनों ने फिलहाल अपना हाईवे जाम समाप्त करने पर सहमति जताई।
हालांकि आंदोलन यहीं नहीं थमा, बल्कि यह राज्य और केंद्र सरकार के बीच जिम्मेदारी तय करने की बहस में भी बदल गया। मध्य प्रदेश सरकार ने शुरुआत में खरीद सीमा को केंद्र की गाइडलाइन से जोड़ते हुए अपनी सीमाएं बताईं, जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सार्वजनिक रूप से कहा कि केंद्र पहले ही मध्य प्रदेश को देश के कुल मूंग खरीद कोटे का बड़ा हिस्सा आवंटित कर चुका है और वास्तविक समस्या राज्य स्तर पर खरीद प्रक्रिया के धीमे संचालन की है।
संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान नेताओं ने सरकार की घोषणा को अधूरा समाधान बताया। उनका कहना है कि 60% खरीद सीमा भी किसानों की पूरी समस्या का समाधान नहीं करती, क्योंकि शेष फसल अब भी उन्हें कम दाम पर निजी व्यापारियों को बेचनी पड़ेगी। किसान संगठन अब भी 100% फसल की MSP पर सरकारी खरीद और पूर्व में किए गए वादों को पूरा करने की मांग पर कायम हैं।
इस आंदोलन को लेकर विपक्ष ने भी सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि किसानों की समस्याओं का समय रहते समाधान नहीं किया गया, जिससे हालात सड़क पर आंदोलन तक पहुंच गए। विपक्ष ने यह भी कहा कि राज्य और केंद्र एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने के बजाय किसानों की आय और कृषि व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दें।
