पश्चिम बंगाल के दक्षिणेश्वर रेलवे स्टेशन पर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब करीब 11,000 वोल्ट की ओवरहेड इलेक्ट्रिक (OHE) तार अचानक टूटकर डाउन डानकुनी–सियालदह लोकल ट्रेन पर गिर गई। रात करीब 8:50 बजे हुए इस हादसे के दौरान तेज धमाके, चिंगारियां और धुएं के गुबार उठने लगे, जिससे प्लेटफॉर्म और ट्रेन में मौजूद यात्रियों में दहशत फैल गई। कई यात्री जान बचाने के लिए ट्रेन से उतरकर प्लेटफॉर्म और ट्रैक की ओर भागने लगे। राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, घटना के तुरंत बाद बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई ताकि किसी तरह की करंट लगने की आशंका न रहे। इंजीनियरों और ट्रैक्शन (TRD) की तकनीकी टीमों को मौके पर भेजा गया, जिन्होंने टूटी हुई हाई-वोल्टेज तार को हटाने और ओवरहेड सिस्टम की मरम्मत का काम शुरू किया। रेलवे का कहना है कि ट्रेन के धातुयुक्त ढांचे ने विद्युत धारा को सुरक्षित तरीके से जमीन तक पहुंचाया, जिससे यात्रियों की जान बच गई।
इस हादसे का असर केवल दक्षिणेश्वर तक सीमित नहीं रहा। सियालदह–डानकुनी सेक्शन की अप और डाउन दोनों लाइनों पर ट्रेन सेवाएं कई घंटों तक प्रभावित रहीं। इसका असर सियालदह मेन लाइन और बोंगांव लाइन तक देखने को मिला, जहां देर रात तक हजारों यात्री ट्रेनों के इंतजार में स्टेशन पर फंसे रहे। मरम्मत कार्य के लिए रेलवे ने टावर वैगन तैनात की और तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं।
प्रारंभिक जांच में वायर टूटने के पीछे तकनीकी खराबी, पुराने उपकरण, अत्यधिक नमी या पैंटोग्राफ से जुड़े किसी तकनीकी कारण की संभावना पर जांच की जा रही है। रेलवे ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है ताकि वास्तविक वजह सामने लाई जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
घटना के बाद यात्रियों ने रेलवे की रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठाए। कई दैनिक यात्रियों का कहना है कि मानसून के दौरान ओवरहेड तारों में खराबी और स्पार्किंग की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन समय रहते रखरखाव नहीं होने से यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ रही है। यात्रियों ने बेहतर निरीक्षण व्यवस्था, समय पर मरम्मत और आपात स्थिति में स्पष्ट सूचना प्रणाली की मांग की है।
