केन-बेतवा लिंक परियोजना विवाद: छतरपुर-पन्ना में विस्थापन के खिलाफ आदिवासी-किसानों का आंदोलन तेज

मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिले में ₹44,000 करोड़ की केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर आदिवासी और किसान लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना के कारण उनकी जमीन, जंगल और आजीविका प्रभावित हो रही है, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा और पुनर्वास का लाभ नहीं मिल रहा।

ग्रामीणों की मुख्य मांग है कि डूब क्षेत्र में आने वाले सभी प्रभावित परिवारों का दोबारा सर्वे किया जाए और उन्हें न्यायसंगत मुआवजा व पुनर्वास दिया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई पात्र परिवारों के नाम सूची से गायब हैं, जबकि कुछ प्रभावशाली लोगों को लाभ मिला है। उन्होंने पेसा कानून (PESA Act) और वन अधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) के पालन की भी मांग उठाई है।

विरोध प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने कई अनोखे तरीके अपनाए। महिलाओं ने चिता सत्याग्रह, जल सत्याग्रह और फंदा डालकर प्रदर्शन करते हुए सरकार से अपनी मांगें पूरी करने की अपील की। कई गांवों की महिलाओं ने पुलिस कार्रवाई के विरोध में चूल्हा बंदी आंदोलन भी किया।

19 जुलाई को पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के बाद विवाद और बढ़ गया। सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मियों द्वारा नदी में प्रदर्शन कर रही महिलाओं और बुजुर्गों को हटाते हुए देखा गया। प्रदर्शनकारियों ने जबरन कार्रवाई का आरोप लगाया, जबकि प्रशासन ने इसे सुरक्षा कदम बताया और कहा कि बढ़ते जलस्तर के कारण लोगों को सुरक्षित हटाना जरूरी था।

किसान नेता अमित भटनागर, जो 18 दिनों से अनशन पर थे, को पुलिस ने अस्पताल में भर्ती कराया। उन्होंने मुआवजा वितरण में करीब ₹400 करोड़ की कथित अनियमितताओं का आरोप लगाया। बाद में प्रशासन द्वारा पात्र परिवारों के दोबारा सत्यापन का आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अनशन स्थगित किया।

इस आंदोलन को लेकर विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने भी सरकार पर सवाल उठाए हैं। वहीं पर्यावरणविदों ने पन्ना टाइगर रिजर्व के वन क्षेत्र और वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।

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