नई दिल्ली में जून में हुए CJP के छात्र आंदोलन से जुड़ा विवाद एक वायरल पॉडकास्ट के बाद फिर सुर्खियों में आ गया। प्रदर्शन के दौरान छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय आजाद के साथ कथित मारपीट के मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज के एक पॉडकास्ट बयान ने राजनीतिक और सामाजिक विवाद को तेज कर दिया। रिपोर्टों के अनुसार, भारद्वाज ने बातचीत में संजय पर कड़ा से हमला करने और उनके सिर में गंभीर चोट पहुंचाने का दावा किया था। बाद में इसी बयान को लेकर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई।
यह मामला 23 जून को जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ा है। संजय आजाद अपनी 14 वर्षीय बेटी के साथ प्रदर्शन में पहुंचे थे, जहां झड़प के दौरान उनके सिर में चोट लगने की बात सामने आई। दिल्ली पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिकॉर्ड में चोट को “साधारण प्रकृति” की बताया गया है और खोपड़ी में फ्रैक्चर की पुष्टि नहीं हुई। वहीं, प्रदर्शनकारियों ने मेडिकल रिपोर्ट और चोट की गंभीरता को लेकर सवाल उठाते हुए मामले की दोबारा जांच और कड़े प्रावधान जोड़ने की मांग की।
विवाद उस समय और बढ़ गया जब वायरल पॉडकास्ट में भारद्वाज ने कथित तौर पर राजनीतिक संपर्कों के जरिए गिरफ्तारी से बचने का दावा किया। पुलिस ने किसी भी राजनीतिक हस्तक्षेप से इनकार किया है। भारद्वाज ने बाद में अपने बचाव में कहा कि घटना हमला नहीं बल्कि आत्मरक्षा में हुई कार्रवाई थी और उनका दावा है कि उन्हें कई लोगों ने घेर लिया था। उन्होंने पॉडकास्ट में किए गए कुछ दावों को मजाक या अतिशयोक्ति भी बताया।
मामले ने तब राजनीतिक रंग ले लिया जब निशु आजाद ने सोशल मीडिया पर भावुक अपील करते हुए अपने पिता के लिए न्याय की मांग की। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने मामले को लेकर सरकार और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए। कांग्रेस की कानूनी टीम ने भी परिवार को कानूनी सहायता देने की बात कही। इसी बीच CJP नेताओं, भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद और अन्य नेताओं ने संसद मार्ग थाने के बाहर प्रदर्शन कर आरोपी की गिरफ्तारी और कड़े कानूनी प्रावधानों की मांग की।
प्रदर्शन और बढ़ते दबाव के बीच पुलिस ने मामले में SC/ST एक्ट से जुड़े प्रावधान जोड़े और नाबालिग की ओर से ऑनलाइन धमकियों एवं कथित उत्पीड़न को लेकर अलग कार्रवाई भी शुरू की। पुलिस ने संजय आजाद की चोटों का दोबारा मूल्यांकन कराने की बात कही, ताकि यह तय किया जा सके कि भारतीय न्याय संहिता के तहत हत्या के प्रयास से जुड़ी धारा लागू करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है या नहीं।
4 सितंबर को पुलिस ने भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया। इसके बाद 5 सितंबर को उनकी गिरफ्तारी की पुष्टि हुई और अदालत ने उन्हें एक दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया। मामले में जांच जारी है और अब पुलिस वायरल वीडियो, मेडिकल रिकॉर्ड, शिकायतों तथा अन्य उपलब्ध सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
