नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र का 4 अगस्त 2026 का दिन तीखी राजनीतिक टकराहट, लगातार हंगामे और महत्वपूर्ण विधायी कार्यवाही के नाम रहा। एक ओर सरकार ने कई अहम विधेयकों को आगे बढ़ाया, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने छात्र आंदोलनों पर पुलिस कार्रवाई, राम मंदिर ट्रस्ट के दान से जुड़े आरोपों और कावेरी जल विवाद को लेकर संसद के भीतर और बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।
लोकसभा में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत Appropriation (No. 3) Bill, 2026 ध्वनिमत से पारित किया गया, जबकि Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 भी पेश किया गया। वहीं राज्यसभा ने Registration of Births and Deaths (Amendment) Bill, 2026 को मंजूरी दी।
नए प्रावधानों के अनुसार, दो वर्ष से अधिक देरी से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण अब केवल प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश से ही संभव होगा। सरकार ने दावा किया कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जिससे मतदाता सूची जैसी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी।
हालांकि विधायी कार्यवाही के समानांतर विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर रहा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्रालय से जुड़े विधेयकों पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए।
विपक्षी दलों ने छात्र आंदोलनों पर कथित पुलिस कार्रवाई, परीक्षा घोटालों और राम जन्मभूमि ट्रस्ट के दान से जुड़े आरोपों पर तत्काल चर्चा की मांग की। विरोध के कारण लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी।
संसद परिसर के मकर द्वार पर भी विपक्षी सांसदों ने प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और राजद के नेताओं ने दान पेटियां रखकर विरोध जताया और राम मंदिर ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग की। इसी दौरान डीएमके सांसदों ने कावेरी जल बंटवारे और मेकेदातु परियोजना के विरोध में अलग प्रदर्शन किया।
सरकार ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया, जबकि भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष परीक्षा घोटालों पर दोहरा रवैया अपना रहा है और संसद का बहुमूल्य समय बर्बाद कर रहा है।
