मानसून सत्र के दौरान 6 अगस्त 2026 को संसद के दोनों सदनों में तीखी राजनीतिक बहस, विरोध प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप देखने को मिले। विपक्ष ने जहां छात्र आंदोलन, पेपर लीक और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर निशाना साधा, वहीं सरकार ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाया।
राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने स्वास्थ्य क्षेत्र में कथित भ्रष्टाचार और मरीजों पर बढ़ते आर्थिक बोझ का मुद्दा उठाया। उन्होंने डॉक्टरों, निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटरों के बीच चल रही कथित रेफरल कमीशन व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसके कारण मरीजों को अनावश्यक जांच और महंगे इलाज के लिए मजबूर होना पड़ता है।
चड्ढा ने दावा किया कि ऐसी व्यवस्था से इलाज का खर्च 15 से 20 फीसदी तक बढ़ जाता है।
वहीं, बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने संसद परिसर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर हमला बोला। उन्होंने झारखंड में चल रहे छात्र प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि राहुल गांधी दिल्ली के आंदोलनों में तो शामिल होते हैं, लेकिन झारखंड के छात्रों के मुद्दों पर उनकी मौजूदगी क्यों नहीं दिखती।
संसद के बाहर मकर द्वार पर INDIA ब्लॉक के सांसदों ने प्रदर्शन किया और गृह मंत्री अमित शाह से छात्र प्रदर्शनों पर जवाब देने की मांग की। विपक्ष ने पेपर लीक मामलों की सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जांच और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की न्यायिक जांच की मांग दोहराई।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि केवल कानून बनाने से परीक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं होगा। उन्होंने वार्षिक परीक्षा कैलेंडर, पेपर लीक की स्वतंत्र जांच, खाली पदों को भरने और छात्र प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की जांच जैसी मांगें रखीं।
इस बीच, सरकार ने विपक्ष पर संसद की कार्यवाही रोकने का आरोप लगाया। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि लगातार हंगामे के कारण महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा प्रभावित हो रही है। हंगामे के बीच टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026 और एप्रोप्रिएशन (नंबर 3) बिल 2026 को मंजूरी दी गई।
लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण लोकसभा और राज्यसभा दोनों में कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
