बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी फेज-2 के अनंत नगर इलाके में सड़क की बदहाली ने एक परिवार की जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी। 12 अगस्त की सुबह 32 वर्षीय मेधा अकरश अपने सहयोगी अजय गुरु के साथ स्कूटर पर EPFO ऑफिस जा रही थीं। तभी अनंत नगर मेन रोड पर एक कार के अचानक ब्रेक लगाने के बाद स्कूटर फिसल गया। दोनों सड़क पर गिर पड़े और मेधा सामने से आ रहे मिनी-गुड्स वाहन की चपेट में आ गईं। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि वाहन चालक कथित तौर पर मौके से फरार हो गया।
मेधा केरल की रहने वाली थीं और इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी फेज-2 स्थित Employees’ Provident Fund Organisation में केंद्रीय सरकारी कर्मचारी थीं। वह अपने पति और तीन साल के बच्चे के साथ अनंत नगर में रहती थीं। यानी सुबह ऑफिस जाने निकली एक मां कुछ ही मिनटों में अपने परिवार से हमेशा के लिए दूर हो गई।
हादसे के बाद मामला सिर्फ सड़क दुर्घटना का नहीं रहा, बल्कि सड़क और प्रशासन की जवाबदेही का सवाल बन गया। पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया में कहा गया कि जहां स्कूटर गिरा, वहां सीधे तौर पर कोई गड्ढा नहीं था और हादसा अचानक ब्रेक लगाने व स्किडिंग की वजह से हुआ। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरी सड़क लंबे समय से बदहाल है। कावेरी जलापूर्ति की पाइपलाइन के काम के बाद सड़क का बड़ा हिस्सा खुदा हुआ था और कई जगहों पर बारिश का पानी, कीचड़ और गड्ढों ने रास्ते को खतरनाक बना दिया था।
स्थानीय लोगों के मुताबिक स्थिति इतनी खराब थी कि दूसरे रास्ते बारिश के पानी और बड़े गड्ढों के कारण मुश्किल हो चुके थे, जिससे वाहन एक संकरे रास्ते पर आने को मजबूर थे। यही संकरी और कीचड़ भरी सड़क ट्रैफिक के साथ मिलकर दोपहिया चालकों के लिए रोज का जोखिम बन गई थी।
मेधा की मौत के बाद इलाके में लोगों का गुस्सा सड़क पर उतर आया। 12 और 13 अगस्त को बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने अधिकारियों का घेराव किया। लोगों ने BWSSB, नगर निकाय और ट्रैफिक अधिकारियों से जवाब मांगा। इसके बाद कैंडल मार्च और सड़क जाम जैसे प्रदर्शन भी हुए। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि अनंत नगर की खराब सड़क, जलभराव और स्ट्रीट लाइट जैसी समस्याओं को लेकर वे वर्षों से शिकायत कर रहे थे, लेकिन प्रशासन की नींद हादसे के बाद खुली।
इसी बीच कर्नाटक के Labour Minister Santosh Lad का बयान विवाद का नया कारण बन गया। मेधा की मौत पर दुख जताते हुए उन्होंने कहा कि सड़क पर गड्ढा हो सकता है, लेकिन एक गड्ढे का मतलब यह नहीं है कि पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर खराब है या सरकार ने पैसा खर्च नहीं किया। उन्होंने सरकार द्वारा सड़क निर्माण पर खर्च का बचाव किया और इसके बाद सड़कों की खराब स्थिति के लिए पिछली BJP सरकार के कार्यकाल को भी जिम्मेदार ठहराया।बस फिर क्या था-सड़क का गड्ढा राजनीतिक गड्ढे में बदल गया।
BJP ने कांग्रेस सरकार पर जमकर हमला बोला और ‘Brand Bengaluru’ अभियान पर सवाल उठाए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार सड़क सुरक्षा और नागरिक सुविधाओं की जगह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझी है। BJP ने जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कथित civic negligence पर FIR की मांग भी उठाई।
बढ़ते विवाद के बाद Santosh Lad ने सोशल मीडिया पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया और उनका उद्देश्य मेधा की मौत का राजनीतिकरण करना नहीं था। उन्होंने दोहराया कि परिवार के प्रति उनकी संवेदनाएं हैं और सरकार पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है।लेकिन इस पूरे मामले ने एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है-अगर सड़क पहले से खराब थी, लोग बार-बार शिकायत कर रहे थे और बारिश के दौरान वही रास्ता जानलेवा बन चुका था, तो हादसा होने से पहले कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्योंकि मेधा के परिवार के लिए यह कोई “पॉटहोल पॉलिटिक्स” नहीं है। उनके लिए यह एक मां, पत्नी और बेटी की जिंदगी का अंत है।और सिस्टम के लिए सवाल सीधा है-सड़क पर गड्ढा छोटा हो सकता है, लेकिन उसकी कीमत कभी-कभी बहुत बड़ी होती है।
