नेपाल में ग्लेशियर टूटने से तबाही, फ्लैश फ्लड में 175+ मौतें

नेपाल के मध्य-उत्तरी हिस्से में चीन के तिब्बत क्षेत्र की सीमा के पास आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में भारी तबाही मचा दी। अचानक आए सैलाब ने कई गांवों, सड़कों, पुलों, बाजारों और सीमा व्यापार केंद्रों को अपनी चपेट में ले लिया। इस आपदा में 175 से अधिक लोगों की मौत की खबर है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता या संपर्क से बाहर बताए जा रहे हैं।

वैज्ञानिक और सैटेलाइट विश्लेषण के अनुसार, इस तबाही की शुरुआत ऊंचाई वाले इलाके में एक बड़े ग्लेशियर के बर्फ और चट्टानों के साथ टूटकर गिरने से हुई। भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और मलबा संकरी नदी घाटी में पहुंचा, जिससे पानी का प्रवाह अचानक कई गुना बढ़ गया। इसके बाद भोटे कोशी और त्रिशूली नदी घाटियों में तेज बहाव ने निचले इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। शुरुआती तौर पर दर्ज भूकंपीय संकेत को 4.4 तीव्रता के भूकंप से जोड़ा गया था, लेकिन बाद में इसे ग्लेशियर और मलबे के भारी प्रभाव से पैदा हुआ सिग्नल बताया गया।

बाढ़ ने रसुवागढ़ी-ग्यिरोंग सीमा मार्ग को भी बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे नेपाल-चीन के बीच जमीनी व्यापार बाधित हुआ। कई प्रमुख पुल और सड़कें बह गईं, जबकि कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा।

दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचना राहत दलों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।नेपाल सेना, पुलिस और सशस्त्र बल हेलीकॉप्टरों के जरिए राहत और बचाव अभियान चला रहे हैं। बड़ी संख्या में भारतीयों समेत विदेशी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के प्रभावित होने की खबरों के बीच भारत ने भी राहत सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने और अस्थिर होने की घटनाएं बढ़ रही हैं। यह आपदा आने वाले समय में जलवायु परिवर्तन और हिमालयी ग्लेशियरों से जुड़े बढ़ते जोखिमों को लेकर गंभीर चेतावनी मानी जा रही है।

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