NCLT ने Zee और Essel Group के संस्थापक Subhash Chandra की personal insolvency repayment plan को मंजूरी दे दी है। योजना के तहत चंद्रा कुल ₹6.5 करोड़ का भुगतान करेंगे-₹6.25 करोड़ creditors को और ₹25 लाख resolution process की लागत के लिए।यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि उनके खिलाफ personal guarantor के तौर पर स्वीकार किए गए दावों की कुल राशि ₹22,006.57 करोड़ है।
यानी lenders को कुल दावों का बेहद छोटा हिस्सा ही वापस मिलेगा। उदाहरण के तौर पर LIC Housing Finance के ₹1,322 करोड़ के admitted claim के मुकाबले उसे करीब ₹38 लाख मिलने हैं।
NCLT में creditors के बीच मतभेद भी सामने आया। LIC Housing Finance, HDFC Bank, Axis Bank, Canara Bank, RBL Bank और अन्य प्रमुख lenders ने योजना का विरोध किया, जबकि 80.81% voting creditors ने इसके पक्ष में मतदान किया। दो सदस्यीय बेंच के मतभेद के बाद मामला तीसरे सदस्य Nilesh Sharma के पास गया, जिन्होंने Section 114 के तहत योजना को मंजूरी दी।
चंद्रा का कहना है कि ₹22,000 करोड़ उनकी व्यक्तिगत उधारी नहीं, बल्कि उन कंपनियों की देनदारियां हैं जिनके लिए उन्होंने personal guarantee दी थी।
उनका दावा है कि Essel Group ने वर्षों में करीब ₹43,000 करोड़ का कर्ज चुकाया, जबकि उनकी व्यक्तिगत संपत्ति और liquidity काफी घट चुकी है।
अब विरोध करने वाले lenders NCLAT का रुख कर रहे हैं। उनका आरोप है कि related-party entities की voting ने योजना को मंजूरी दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वहीं यह आदेश Essel Group की मूल कंपनियों की देनदारियां खत्म नहीं करता-यह केवल Subhash Chandra की personal guarantee insolvency proceedings से संबंधित है।
