पटाखों की फैक्ट्री में धमाकों की दहशत! एक विस्फोट ने उजाड़ दिए घर, मलबे में जिंदगी की तलाश जारी

उत्तर प्रदेश के कौशांबी–प्रयागराज बॉर्डर पर सोमवार, 31 अगस्त को एक पटाखा निर्माण इकाई में भीषण आग के बाद लगातार कई धमाके हुए। करीब सुबह 10:40 बजे शुरू हुई आग ने परिसर में रखे बारूद और पटाखों को अपनी चपेट में ले लिया, जिसके बाद एक के बाद एक तेज धमाकों से पूरा इलाका दहल उठा।

बताया जा रहा है कि यूनिट Manauri Power House के पास Mohammadpur गांव में एक घरनुमा संरचना में चल रही थी। धमाकों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि फैक्ट्री पूरी तरह ढह गई और आसपास के करीब 4 से 6 मकान भी क्षतिग्रस्त या धराशायी हो गए। आसपास के घरों के शीशे टूट गए और मलबा दूर तक फैल गया।

हादसे में कई लोगों की मौत और दर्जनों के घायल होने की सूचना है। मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं क्योंकि मलबे से शव निकालने और पहचान की प्रक्रिया जारी है। गंभीर रूप से घायल लोगों को Prayagraj के SRN Hospital Trauma Centre में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ मरीजों की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है।

रेस्क्यू ऑपरेशन में स्थानीय पुलिस और फायर ब्रिगेड के साथ NDRF, SDRF और Manauri Air Force Station के जवान भी जुटे हैं। घटनास्थल से करीब 2 किलोमीटर दूर स्थित Air Force Station से विशेषज्ञ टीमों को भी मौके पर भेजा गया। भारी मलबा हटाने के लिए JCB और अन्य मशीनों की मदद ली जा रही है।

इस हादसे ने फैक्ट्री की कानूनी अनुमति, बारूद के भंडारण और सुरक्षा मानकों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जानकारी में यूनिट के एक रिहायशी ढांचे में और कृषि क्षेत्र के बीच संचालित होने की बात सामने आई है। प्रशासन अब यह जांच कर रहा है कि फैक्ट्री के पास वैध लाइसेंस था या नहीं और निर्धारित सीमा से अधिक विस्फोटक सामग्री तो नहीं रखी गई थी।

घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को राहत और बचाव अभियान तेज करने तथा घायलों को तत्काल बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।

सबसे बड़ा सवाल अब यही है-अगर इतनी बड़ी मात्रा में बारूद आबादी के इतने करीब रखा गया था, तो सुरक्षा और लाइसेंसिंग की निगरानी आखिर कहां थी?

हादसे की असली वजह और जिम्मेदारी तय होने तक जांच जारी है।

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