दिशा सालियान केस में CBI की FIR, आदित्य ठाकरे समेत कई नामों की भूमिका की होगी जांच

दिशा सालियान की 2020 में हुई मौत का मामला छह साल बाद एक बार फिर जांच के केंद्र में आ गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सितंबर 2026 में FIR दर्ज कर नई जांच शुरू कर दी है। दिशा अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर थीं और 8 जून 2020 को मुंबई के मालाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद उनकी मौत हुई थी। शुरुआती जांच में मुंबई पुलिस ने इसे Accidental Death Report (ADR) के तौर पर दर्ज किया था और बाद में आत्महत्या की बात कही थी। हालांकि, दिशा के पिता सतीश सालियान ने उनकी मौत में साजिश, हत्या और यौन हिंसा के आरोप लगाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की थी।

CBI की FIR में शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे, उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख, अभिनेता डिनो मोरिया, सूरज पंचोली, रिया चक्रवर्ती, शोविक चक्रवर्ती और दिशा के पूर्व मंगेतर रोहन रॉय समेत कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में रखी गई है। इसके अलावा पूर्व मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह, बर्खास्त पुलिस अधिकारी सचिन वाजे, मालवणी पुलिस स्टेशन के अधिकारी, फोरेंसिक अधिकारियों, पोस्टमार्टम से जुड़े डॉक्टरों और SIT के सदस्यों की भूमिका भी जांची जाएगी। FIR में रिकॉर्ड दबाने या बदलने, सबूत नष्ट करने और कथित कवर-अप जैसे आरोपों की भी जांच का उल्लेख है।

मामले में दिशा के मोबाइल फोन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। FIR में आरोप है कि फोन जब्त किए जाने के बाद उसकी गतिविधियों और डेटा को लेकर विरोधाभास सामने आए तथा संभावित गवाहों की पहचान और डेटा से छेड़छाड़ की आशंका की जांच जरूरी है। हालांकि, ये सभी बातें फिलहाल शिकायत और FIR में दर्ज आरोप हैं, जिन्हें CBI को सबूतों के आधार पर सत्यापित करना होगा।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को मुंबई पुलिस की लगभग छह साल लंबी जांच पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा था कि जांच “जवाब देने से ज्यादा सवाल खड़े करती है।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि FIR दर्ज होने से किसी व्यक्ति को स्वतः आरोपी नहीं माना जाएगा। जांच अधिकारी को उपलब्ध सामग्री के आधार पर पर्याप्त संदेह मिलने के बाद ही किसी को आरोपी के तौर पर देखा जा सकता है। अगर अपराध के पर्याप्त सबूत मिलते हैं तो CBI अदालत में उचित रिपोर्ट दाखिल करेगी और यदि अपराध साबित नहीं होता तो क्लोजर/समरी रिपोर्ट पेश करनी होगी।

यह मामला सुशांत सिंह राजपूत की मौत से भी जुड़ी सार्वजनिक चर्चाओं के कारण लगातार सुर्खियों में रहा है। CBI ने 2025 में सुशांत मामले की जांच बंद करते हुए आत्महत्या की थ्योरी को स्वीकार किया था, लेकिन संबंधित क्लोजर रिपोर्ट पर अदालत की अंतिम सुनवाई अभी बाकी है। अब दिशा सालियान मामले में नई CBI जांच से यह तय होना है कि आरोपों के पीछे कोई आपराधिक साजिश या अन्य अपराध के पर्याप्त सबूत मौजूद हैं या नहीं।

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