Tata Sons में बड़ा संकट: चंद्रशेखरन की विदाई और IPO पर RBI के फैसले से बढ़ी हलचल

Tata Sons के भविष्य को लेकर चल रही अनिश्चितता अब एक बड़े कॉरपोरेट और नियामकीय मोड़ पर पहुंच गई है। Tata Sons के चेयरमैन N. Chandrasekaran ने घोषणा की है कि वह फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद दोबारा चेयरमैन पद के लिए अपना नाम आगे नहीं बढ़ाएंगे। यह फैसला ऐसे समय आया है जब कंपनी के भीतर Tata Trusts और Tata Sons के बीच नेतृत्व और रणनीतिक दिशा को लेकर मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं।

चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल पर फरवरी 2026 में Tata Sons बोर्ड की बैठक में फैसला टल गया था। रिपोर्टों के मुताबिक Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने कंपनी के प्रदर्शन, पूंजी निवेश और रणनीतिक दिशा को लेकर कुछ चिंताएं उठाई थीं। Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66% हिस्सेदारी है, इसलिए बोर्ड और ट्रस्ट्स के बीच सहमति कंपनी के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

दूसरी बड़ी चुनौती Tata Sons के संभावित IPO की है। Reserve Bank of India ने Tata Sons को Upper-Layer NBFC के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसके तहत कंपनी पर सार्वजनिक लिस्टिंग से जुड़े नियम लागू होते हैं। Tata Sons ने अपनी NBFC-CIC registration surrender करने की कोशिश की थी, ताकि वह निजी कंपनी बनी रह सके, लेकिन RBI ने हाल ही में यह अनुरोध खारिज कर दिया। मार्च 2025 तक Tata Sons की standalone assets करीब ₹1.75 लाख करोड़ थीं, जो RBI की संबंधित सीमा से काफी ऊपर हैं।

RBI के फैसले के बाद Tata Sons के IPO की संभावना फिर चर्चा में आ गई है। इतना ही नहीं, RBI ने Bombay High Court में caveat भी दाखिल किया है, जिससे संकेत मिलता है कि संभावित कानूनी चुनौती की स्थिति में वह अपना पक्ष मजबूती से रखना चाहता है।

अब Tata Sons के सामने दो बड़े सवाल हैं-2027 के बाद नेतृत्व किसके हाथ में जाएगा और क्या देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक की holding company आखिरकार शेयर बाजार में दस्तक देगी।

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