‘सुरक्षा चाहिए, बंदिश नहीं’-आस्था कुंज के बाद सड़कों पर उतरीं DU की छात्राएं, दिल्ली के पार्कों से उठी बड़ी बहस

दिल्ली के Aastha Kunj Park में 17 वर्षीय लड़की के साथ कथित गैंगरेप के बाद दक्षिण दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर शुरू हुआ आक्रोश अब बड़े छात्र आंदोलन का रूप ले चुका है। Lady Shri Ram College for Women (LSR), Gargi College, Kamala Nehru College और अन्य Delhi University कॉलेजों की छात्राओं ने सड़कों पर उतरकर सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों, बेहतर रोशनी और प्रभावी पुलिस गश्त की मांग उठाई। 23 सितंबर को LSR के पीछे National Park के पास सैकड़ों छात्राएं जुटीं, जबकि 25 सितंबर को करीब 200 DU छात्रों ने Siri Fort Road और August Kranti Marg के आसपास मार्च किया।

इस आंदोलन की पृष्ठभूमि में सिर्फ Aastha Kunj की घटना नहीं बल्कि उसके बाद उठाए गए सुरक्षा कदम भी हैं। DDA ने अपने पार्कों में रात के समय प्रवेश को सीमित करने, चुनिंदा gates खुले रखने, अतिरिक्त lighting लगाने, CCTV मजबूत करने और सुरक्षा कर्मियों की निगरानी बढ़ाने का फैसला किया। साथ ही सभी DDA parks का safety audit कराने की बात कही गई। इन उपायों का उद्देश्य सुरक्षा बढ़ाना बताया गया, लेकिन छात्राओं ने सवाल उठाया कि क्या सार्वजनिक स्थानों को महिलाओं के लिए सुरक्षित बनाने का रास्ता उनकी आवाजाही सीमित करना होना चाहिए।


छात्राओं की मांग का केंद्र यही है कि सुरक्षा व्यवस्था ऐसी हो जिससे महिलाएं शाम के बाद भी शहर की सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल कर सकें। प्रदर्शनों में बेहतर street lighting, CCTV, नियमित beat patrolling और dark spots की पहचान कर उन्हें सुरक्षित बनाने की मांग सामने आई। Friday के प्रदर्शन में छात्रों ने “Delhi citizens” के लिए एक charter तैयार करने के लिए Siri Fort Road पर open consultations भी कीं।
LSR के आसपास की स्थिति ने इस चिंता को और गहरा किया। Aastha Kunj घटना के बाद पुलिस ने मुख्य आरोपी Asif को Amar Colony इलाके में मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया। LSR प्रशासन ने सुरक्षा चिंताओं के कारण एक दिन के लिए physical classes रोककर teaching online कर दी।

हालांकि कॉलेज ने अगले दिन offline classes फिर शुरू कर दीं। छात्रों के लिए कॉलेज के आसपास का करीब 500 मीटर का dark stretch भी सुरक्षा चिंता का विषय बना हुआ है।
प्रदर्शन में शामिल कई छात्राओं ने यह भी कहा कि वे सार्वजनिक स्थानों पर अपनी मौजूदगी को सीमित करने के बजाय उन परिस्थितियों में बदलाव चाहती हैं जो अपराध के लिए असुरक्षित माहौल बनाती हैं। कुछ छात्रों ने विरोध के दौरान चेहरे ढके रखे और बताया कि उन्हें अपने कॉलेज, attendance या academic consequences को लेकर चिंता है।

Aastha Kunj Park की घटना के बाद सामने आई ground reports में broken boundary walls, unmanned gates और कई अंधेरे हिस्सों का भी उल्लेख हुआ है। ऐसे में बहस अब सिर्फ एक आपराधिक मामले की जांच तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि क्या दिल्ली के सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था अपराध होने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से जोखिम कम करने पर केंद्रित हो सकती है।

दक्षिण दिल्ली की छात्राओं का आंदोलन इसी बड़े सवाल को सामने रख रहा है-सुरक्षा का मतलब सार्वजनिक जगहों से पीछे हटना है या उन जगहों को इस तरह सुरक्षित बनाना कि महिलाएं बिना डर अपनी रोजमर्रा की जिंदगी जी सकें? फिलहाल DDA के safety audits, अतिरिक्त lighting, security deployment और पुलिस गश्त जैसे कदम आगे की तस्वीर तय करेंगे। छात्रों की मांग है कि इन उपायों का असर सिर्फ कागज पर नहीं बल्कि जमीन पर भी दिखाई दे।

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