जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ के एक छोटे से गांव से निकली शीतल देवी ने जापान में ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरी दुनिया की नजरें भारतीय पैरा तीरंदाजी पर टिक गईं। 2026 एशियन पैरा गेम्स में शीतल ने दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। खास बात यह रही कि उन्होंने एक ही दिन में दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए और महिला कंपाउंड व्यक्तिगत स्पर्धा में अपना खिताब भी बरकरार रखा।
शीतल ने कंपाउंड मिक्स्ड टीम स्पर्धा में तोमन कुमार के साथ मिलकर इंडोनेशिया की जोड़ी को 151-148 से हराया। इससे पहले दोनों ने क्वालिफिकेशन राउंड में 1,402 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इसके बाद महिला कंपाउंड व्यक्तिगत फाइनल में शीतल का सामना सिंगापुर की नूर स्याहिदाह अलीम से हुआ। मुकाबले में पिछड़ने के बावजूद उन्होंने शानदार वापसी की और 142-139 से जीत दर्ज कर गोल्ड मेडल हासिल किया।
महिला कंपाउंड डबल्स में शीतल और पायल नाग की जोड़ी ने सिल्वर मेडल जीता। इस स्पर्धा के फाइनल में उन्हें चीन की जोड़ी से हार का सामना करना पड़ा। शीतल ने व्यक्तिगत क्वालिफिकेशन में भी 720 में से 704 अंक हासिल कर विश्व रिकॉर्ड की बराबरी की।
10 जनवरी 2007 को किश्तवाड़ के लोइधर गांव में जन्मीं शीतल फोकोमेलिया नामक जन्मजात स्थिति के साथ पैदा हुईं, जिसके कारण उनके दोनों हाथ विकसित नहीं हुए। बचपन में पेड़ों पर चढ़ने का शौक रखने वाली शीतल की जिंदगी ने 2021 में नया मोड़ लिया, जब भारतीय सेना के जवानों ने उनकी प्रतिभा पहचानी और उन्हें खेल प्रशिक्षण से जुड़ने में मदद की।
शीतल अपने पैरों से धनुष संभालती हैं और मुंह की मदद से उसकी डोरी खींचकर निशाना लगाती हैं। उनकी यह अनोखी तकनीक, वर्षों की मेहनत और दबाव में शांत रहने की क्षमता उन्हें दुनिया की शीर्ष पैरा तीरंदाजों में शामिल करती है। पेरिस पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतने के बाद अब एशियन पैरा गेम्स में तीन पदकों के साथ उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्रतिभा को किसी सीमा में नहीं बांधा जा सकता।
