The All India Muslim Personal Law Board (AIMPLB) staged a protest against the Waqf (Amendment) Bill 2024

वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ AIMPLB का राष्ट्रव्यापी आंदोलन, 26 मार्च से शुरू

नई दिल्ली, 23 मार्च 2025
दिल्ली में 17 मार्च को हुए ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। इस आंदोलन की शुरुआत 26 मार्च को पटना और 29 मार्च को विजयवाड़ा में बड़े पैमाने पर विरोध-प्रदर्शनों से होगी।

बोर्ड के प्रवक्ता एवं एक्शन कमेटी के संयोजक डॉ. एस.क्यू.आर. इलियास ने प्रदर्शन की सफलता के लिए मुस्लिम संगठनों, सिविल सोसाइटी, दलित, आदिवासी, ओबीसी और अन्य अल्पसंख्यक नेताओं का आभार जताया। उन्होंने कहा, “अल्लाह की मदद और सभी वर्गों के सहयोग के बिना दिल्ली का प्रदर्शन सफल नहीं हो सकता था।”

डॉ. इलियास ने बताया कि AIMPLB द्वारा गठित 31 सदस्यीय एक्शन कमेटी ने इस विधेयक को विवादास्पद, पक्षपातपूर्ण और अल्पसंख्यक अधिकारों के लिए घातक बताया है। बोर्ड का मानना है कि इस विधेयक के खिलाफ संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीकों से आंदोलन जरूरी है।

पहला चरण: पटना और विजयवाड़ा में विरोध प्रदर्शन

  • पटना: 26 मार्च को विधानसभा के सामने धरना, जिसमें जदयू, राजद, कांग्रेस, और लोक जनशक्ति पार्टी के नेताओं को आमंत्रण।
  • विजयवाड़ा: 29 मार्च को आंध्र प्रदेश विधानसभा के सामने विरोध प्रदर्शन। इसमें टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस, कांग्रेस और वाम दलों को आमंत्रित किया गया है।

AIMPLB के अनुसार, इन विरोध-प्रदर्शनों का उद्देश्य बीजेपी की सहयोगी पार्टियों को संदेश देना है — या तो वे वक्फ विधेयक का समर्थन छोड़ें, या फिर मुस्लिम समुदाय का समर्थन खो दें।

आंदोलन की चरणबद्ध योजना

डॉ. इलियास ने बताया कि अगली कड़ियों में हैदराबाद, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, मलेरकोटला (पंजाब) और रांची में विशाल जनसभाएं की जाएंगी। इसके अलावा सिट-इन धरने, मानव श्रृंखलाएं और जिलाधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपे जाएंगे।

इस अभियान को सोशल मीडिया पर भी पूरी ताकत से चलाया जाएगा। ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर #SaveWaqf, #RejectWaqfBill, जैसे हैशटैग के साथ कैम्पेन चलाया जाएगा। हर जिले में प्रदर्शन, कॉन्फ्रेंस और मीडिया के ज़रिये जन-जागरूकता फैलाने की योजना है।

AIMPLB का आह्वान

AIMPLB ने सभी धार्मिक, सामाजिक और राजनैतिक संगठनों से इस आंदोलन में भाग लेने की अपील की है। बोर्ड का कहना है कि यह केवल मुस्लिम समुदाय का मामला नहीं, बल्कि भारत के संविधान, अल्पसंख्यक अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का सवाल है।

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