CBSE की On-Screen Marking (OSM) प्रणाली को लेकर देशभर में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें तीन छात्रों-वेदांत श्रीवास्तव (दिल्ली), सार्थक सिद्धांत (झारखंड) और निशर्गा अधिकारी-ने अलग-अलग स्तर पर अपनी चिंताएं और आरोप सामने रखे हैं। इन मामलों ने अब एक व्यापक बहस का रूप ले लिया है, जिसमें परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, साइबर सुरक्षा और जवाबदेही जैसे मुद्दे शामिल हो गए हैं।
वेदांत श्रीवास्तव, जो दिल्ली के एक कक्षा 12 के छात्र हैं, ने आरोप लगाया कि उनके फिजिक्स के उत्तर पुस्तिका में गड़बड़ी हुई है। उनका कहना है कि उनके रोल नंबर के तहत अपलोड की गई कॉपी उनके वास्तविक उत्तरों से मेल नहीं खाती, जिससे मूल्यांकन प्रक्रिया की सटीकता पर सवाल उठे हैं।
वहीं झारखंड के 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत ने OSM सिस्टम से जुड़े टेंडर और क्रियान्वयन प्रक्रिया का अध्ययन कर कुछ कथित अनियमितताओं की ओर इशारा किया है। उनका कहना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली के चयन और लागू करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है।
तीसरे मामले में साइबर सुरक्षा के शौकीन निशर्गा अधिकारी ने CBSE से जुड़े एक परीक्षण पोर्टल में संभावित सुरक्षा कमजोरियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए डेमो के बाद यह मुद्दा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और सिस्टम की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई।
इन घटनाओं के बाद यह मामला केवल तकनीकी शिकायतों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन छात्रों ने अपनी चिंताओं को लेकर विभिन्न मंचों पर भी अपनी बात रखी, जिससे यह मुद्दा और अधिक सुर्खियों में आ गया।
निष्कर्ष
CBSE OSM विवाद अब एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है, जिसमें परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता, डिजिटल सुरक्षा और संस्थागत जवाबदेही जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे केंद्र में आ गए हैं।
