पंजाब की राजनीति इन दिनों एक वायरल वीडियो विवाद को लेकर गरमा गई है, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे तेजी से फैल रहे हैं। यह वीडियो सामने आने के बाद मामला केवल राजनीतिक नहीं रहा, बल्कि धार्मिक संवेदनशीलता और डिजिटल फेक कंटेंट की बहस तक पहुंच गया है।सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो को लेकर कई सिख संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
धार्मिक समुदायों की ओर से इसे गंभीर मामला बताते हुए अकाल तख्त की भूमिका पर भी चर्चा तेज हो गई है। कुछ संगठनों ने इस पूरे प्रकरण पर नाराज़गी जताते हुए सख्त कार्रवाई और जवाबदेही की मांग की है, जिससे पंजाब में माहौल तनावपूर्ण राजनीतिक बहस में बदल गया है।विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार पर हमला तेज कर दिया है और मुख्यमंत्री की छवि पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इस तरह के विवाद शासन की विश्वसनीयता और जनता के भरोसे को प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के नेता इसे एक “साजिशन फैलाया गया डिजिटल प्रोपेगेंडा” बता रहे हैं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने खुद सामने आकर इन आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि वायरल वीडियो को गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह वीडियो AI-based deepfake या एडिटेड कंटेंट हो सकता है और जनता से अपील की है कि बिना सत्यापन के किसी भी वायरल सामग्री पर विश्वास न करें।पंजाब में आम जनता की राय इस मामले पर बंटी हुई दिखाई दे रही है – कुछ लोग इसे बेहद गंभीर मान रहे हैं और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं, जबकि कई लोग इसे चुनाव से पहले की राजनीतिक साजिश और डिजिटल तकनीक के दुरुपयोग का परिणाम बता रहे हैं।
जैसे-जैसे राज्य में चुनाव नजदीक आ रहे हैं, यह विवाद राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे डिजिटल और वायरल विवाद अब भारतीय राजनीति में एक नया चुनावी हथियार बनते जा रहे हैं।
