दिल्ली और एनसीआर में हाल के समय में लगातार हो रहे अग्निकांड ने शहरी सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। Malviya Nagar में एक होटल/कमर्शियल बिल्डिंग में लगी भीषण आग ने कई लोगों को संकट में डाल दिया, जहां तेज़ी से फैलती आग के कारण लोगों को खिड़कियों और सीढ़ियों के जरिए रेस्क्यू करना पड़ा। वहीं Khoda Colony जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में समय-समय पर आग लगने की घटनाएं यह दिखाती हैं कि तंग गलियां, अवैध निर्माण और कमजोर फायर सिस्टम बड़े खतरे का कारण बन रहे हैं।
इसी बीच हाल ही में Noida के सेक्टर 74 स्थित IVY County सोसाइटी में 12वीं मंजिल के एक फ्लैट में भीषण आग लग गई, जिससे पूरे टावर में धुआं फैल गया और लोग घबरा गए। फायर ब्रिगेड की टीमों ने मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया और कई निवासियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना ने हाई-राइज बिल्डिंग्स में फायर सेफ्टी सिस्टम की वास्तविक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार इन घटनाओं के पीछे प्रमुख कारण हैं – पुरानी वायरिंग, ओवरलोडेड बिजली सिस्टम, फायर NOC की कमी और नियमित निरीक्षण का अभाव।
सरकार को सभी हाई-राइज और कमर्शियल बिल्डिंग्स के लिए अनिवार्य फायर ऑडिट सिस्टम लागू करना चाहिए। हर इमारत में फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम की अनिवार्यता सुनिश्चित करनी होगी। फायर NOC के बिना किसी भी बिल्डिंग को संचालन की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके साथ ही हर जिले में फास्ट-रिस्पॉन्स फायर यूनिट्स बढ़ाई जानी चाहिए और इमरजेंसी रिस्पॉन्स टाइम को कम करने के लिए टेक्नोलॉजी आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाना चाहिए। अवैध निर्माण और बिना सुरक्षा मानकों वाली बिल्डिंग्स पर सख्त कार्रवाई भी जरूरी है।
नागरिकों को भी अपने घर और ऑफिस में इलेक्ट्रिकल सेफ्टी का ध्यान रखना चाहिए, ओवरलोडिंग से बचना चाहिए और समय-समय पर वायरिंग व गैस सिस्टम की जांच करानी चाहिए।निष्कर्षये घटनाएं केवल हादसे नहीं बल्कि एक चेतावनी हैं कि अगर सरकार और नागरिक दोनों ने मिलकर सुरक्षा उपाय नहीं अपनाए, तो शहरी भारत में यह संकट और गंभीर रूप ले सकता है।
