राजस्थान के कोटा में हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने NEET और JEE की तैयारी कर रहे छात्रों से मुलाकात की, जहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी अपने अनुभव और समस्याएं साझा करने पहुंचे। कोटा, जो देश का सबसे बड़ा कोचिंग हब माना जाता है, वहां यह कार्यक्रम छात्रों के मानसिक दबाव, परीक्षा प्रणाली और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया।इस मुलाकात के दौरान कई छात्रों ने खुलकर बताया कि लगातार परीक्षा का दबाव, भारी फीस, असफलता का डर और प्रतिस्पर्धा का तनाव उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है।
कुछ छात्रों ने यह भी कहा कि बार-बार होने वाली पेपर लीक और परीक्षा में अनिश्चितता के कारण उनका भरोसा सिस्टम पर कमजोर हो रहा है।राहुल गांधी ने छात्रों की बात सुनते हुए शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि आज के युवाओं पर जरूरत से ज्यादा दबाव डाला जा रहा है, जिससे उनका मानसिक संतुलन प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने यह भी जोर दिया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल प्रतिस्पर्धा नहीं बल्कि सीखने और विकास का माध्यम होना चाहिए।छात्रों के बीच इस बातचीत को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ छात्रों ने कहा कि पहली बार किसी बड़े नेता ने उनके मुद्दों को सीधे सुना, जबकि कुछ का मानना था कि इस तरह की मुलाकातें जरूरी तो हैं, लेकिन असली बदलाव नीतिगत स्तर पर होना चाहिए।
कोटा की यह मुलाकात एक बार फिर इस बड़े सवाल को सामने लाती है कि भारत की शिक्षा प्रणाली में सुधार कितना जरूरी है। परीक्षा का दबाव, मानसिक स्वास्थ्य और पेपर लीक जैसे मुद्दे अब केवल शैक्षणिक नहीं बल्कि सामाजिक चिंता बन चुके हैं, जिन पर ठोस नीति और सुधार की आवश्यकता है।
