एयरपोर्ट या ‘सी-पोर्ट’? नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पहली बारिश ने खोल दी ड्रेनेज की पोल!

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर से सामने आए कुछ वीडियो ने सोशल मीडिया पर ऐसा हंगामा मचा दिया कि लोगों ने एयरपोर्ट को “Airport-cum-Seaport” कहना शुरू कर दिया।

तेज बारिश के बाद टर्मिनल और पार्किंग एरिया को जोड़ने वाले रास्ते पर पानी भर गया, जिसके चलते यात्रियों को कुछ देर जलभराव के बीच से गुजरना पड़ा और ग्राउंड स्टाफ को पानी निकालने के लिए पंप लगाने पड़े।

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई। लोगों ने सवाल उठाया कि करीब ₹11,000 करोड़ से ज्यादा की लागत वाले नए इंटरनेशनल एयरपोर्ट की पहली ही बारिश में ड्रेनेज सिस्टम क्यों परेशान हो गया। यानी फ्लाइट की टिकट ली थी, लेकिन कुछ देर के लिए “बोटिंग एक्सपीरियंस” फ्री में मिल गया।

मामला राजनीतिक हुआ तो समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने वीडियो शेयर करते हुए सरकार पर निशाना साधा और पूछा कि क्या अब एयरपोर्ट पर नावें चलेंगी। कांग्रेस और AAP ने भी जलभराव को लेकर सरकार और इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए।

हालांकि एयरपोर्ट प्रशासन ने साफ किया कि पानी सिर्फ टर्मिनल से पार्किंग की ओर जाने वाले एक सीमित हिस्से में जमा हुआ था। अचानक हुई करीब 27 मिमी तेज बारिश के कारण कुछ समय के लिए ड्रेनेज सिस्टम पर दबाव बढ़ा। अधिकारियों के मुताबिक करीब 30 मिनट में पंप लगाकर पानी निकाल दिया गया और ट्रैफिक को वैकल्पिक रास्ते से डायवर्ट किया गया।सबसे बड़ी बात-फ्लाइट ऑपरेशन पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। रनवे, एप्रन और टर्मिनल के अंदर की व्यवस्थाएं सामान्य रूप से चलती रहीं।

यात्रियों को भी वैकल्पिक पिकअप व्यवस्था उपलब्ध कराई गई।मौके पर पहुंचे जेवर विधायक धीरेंद्र सिंह ने भी ड्रेनेज व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने माना कि साइट का stormwater shaft छोटा है और उसे चौड़ा करने की जरूरत है। साथ ही लैंडस्केपिंग में भी बदलाव की बात कही गई, ताकि बारिश का पानी दोबारा पैदल मार्ग की ओर न जाए।

अब मामला सिर्फ कुछ मिनट के जलभराव का है या नए एयरपोर्ट की मॉनसून तैयारी पर बड़ा सवाल-इस पर राजनीति और सोशल मीडिया दोनों अपने-अपने जवाब दे रहे हैं। फिलहाल एयरपोर्ट प्रशासन का दावा है कि बारिश ने फ्लाइट्स को नहीं रोका, लेकिन इंटरनेट ने जरूर इस पूरे मामले को “Airport vs Rain: First Round” बना दिया।

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