दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP (Cockroach Janta Party) द्वारा चलाया जा रहा विरोध प्रदर्शन अब लगातार चौथे दिन भी जारी है, जहां सैकड़ों छात्र, युवा और अभिभावक NEET, SSC, CUET और CBSE जैसी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक मामलों के खिलाफ धरना दे रहे हैं, प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने की है,
आंदोलन के दौरान लगातार “Sadda Haq” और “Resign Pradhan” जैसे नारे गूंज रहे हैं, वहीं कई प्रदर्शनकारी रात-दिन जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं, जिससे यह आंदोलन अब केवल एक विरोध नहीं बल्कि एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप लेता जा रहा है।प्रदर्शन स्थल पर आंदोलनकारियों द्वारा अनोखे और प्रतीकात्मक तरीके भी अपनाए जा रहे हैं, जैसे मास्क पहनकर प्रदर्शन करना, थाली-चम्मच के साथ विरोध जताना, और “Go Pradhan Go” जैसे नारे लगाना,
इसके अलावा CJP की ओर से एक प्रतीकात्मक “फ्री लाइब्रेरी” भी शुरू की गई है ताकि यह संदेश दिया जा सके कि शिक्षा ही आंदोलन का मूल आधार है, साथ ही कुछ रचनात्मक विरोध अभियानों जैसे “डायपर डोनेशन ड्राइव” और अन्य प्रतीकात्मक संदेशों के जरिए युवाओं के गुस्से और निराशा को दर्शाने की कोशिश की गई है।स्थानीय प्रशासन और दिल्ली पुलिस ने स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है और भीड़ नियंत्रण पर नजर बनाए हुए हैं,
कुछ शुरुआती चरणों में कुछ प्रदर्शनकारियों को हिरासत में भी लिया गया था ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके लगातार मौके पर मौजूद रहकर आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं और समर्थकों से शांतिपूर्ण लेकिन मजबूत प्रदर्शन जारी रखने की अपील कर रहे हैं।
यह आंदोलन अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुका है, जहां कुछ लोग इसे छात्रों की वास्तविक आवाज मान रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसकी रणनीति और तरीके पर सवाल उठा रहे हैं।
कुल मिलाकर, यह आंदोलन अब भारत की परीक्षा प्रणाली, भर्ती प्रक्रिया और शिक्षा में पारदर्शिता को लेकर एक बड़े राष्ट्रीय बहस का रूप ले चुका है, और आने वाले दिनों में इसमें और भी राजनीतिक तथा सामाजिक विस्तार देखने को मिल सकता है, खासकर अगर अन्य समूह, जैसे किसान संगठन, भी इसमें शामिल होते हैं।
