उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के नागरासू गुरुद्वारे में पिछले तीन दिनों से चला आ रहा निहंग सिखों का गतिरोध आखिरकार शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हो गया। यह पूरा विवाद कर्णप्रयाग क्षेत्र में पार्किंग को लेकर हुए एक स्थानीय विवाद के बाद शुरू हुआ था, जिसमें स्थानीय लोगों और निहंग सिखों के बीच कथित झड़प हो गई थी। इस घटना के बाद पुलिस ने कुछ निहंग व्यक्तियों को हिरासत में लिया था, जिन पर आरोप था कि झड़प के दौरान उन्होंने तलवारें निकालकर कथित रूप से स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया और कुछ लोगों को चोटें आईं, जिसके चलते पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
इन्हीं गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग को लेकर निहंग सिखों का एक समूह नागरासू गुरुद्वारे की छत और ऊपरी मंजिलों पर चढ़ गया और तीन दिनों से अधिक समय तक वहीं डटा रहा। उनका कहना था कि गिरफ्तारियां एकतरफा थीं और उनके साथियों को न्याय मिलना चाहिए।
स्थिति तब और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी पारंपरिक हथियारों जैसे भाले और तलवारों के साथ छत पर बने रहे और प्रशासन की कई अपीलों के बावजूद नीचे आने से इनकार कर दिया। इसके बाद इलाके में भारी पुलिस बल के साथ-साथ स्थानीय पुलिस के साथ-साथ विभिन्न डिफेंस फोर्सेज की टीमें भी तैनात की गईं, और पुलिस ने उनके साथ मिलकर पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को नियंत्रित किया। साथ ही कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाओं पर भी नियंत्रण लगाया गया।
लंबी बातचीत और कई दौर की वार्ताओं के बाद पंजाब से आए निहंग प्रतिनिधियों ने मध्यस्थता की, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्वक नीचे आने और प्रशासन के साथ सहयोग करने के लिए राजी किया गया। इसके बाद यह तीन दिन लंबा गतिरोध बिना किसी बड़ी हिंसा के समाप्त हो गया।
इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में कानून-व्यवस्था, धार्मिक समूहों के प्रदर्शन अधिकार और प्रशासनिक प्रतिक्रिया को लेकर एक बार फिर बहस को जन्म दिया है।
