बारिश बनी आफत: मुंबई-पुणे में तबाही, एक्सप्रेसवे जाम और डूबे शहरों के बीच तैयारी पर बड़ा सवाल

महाराष्ट्र में मॉनसून 2026 ने पिछले 48 घंटों में भारी तबाही मचाई है। मुंबई, पुणे और आसपास के इलाकों में तेज बारिश, भूस्खलन और जलभराव के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, बारिश से जुड़ी घटनाओं में 13 लोगों की मौत हुई है, जिसमें मुंबई के मानखुर्द इलाके में मकान गिरने की घटना में बच्चों समेत कई लोगों की जान गई।

वहीं मावल क्षेत्र में लैंडस्लाइड और मुंबई के उपनगरों में पेड़ गिरने की घटनाओं ने हालात और गंभीर बना दिए।मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर भी भारी बारिश का असर देखने को मिला, जहां टनल-2 के पास बड़े पैमाने पर मलबा गिरने से यातायात कई घंटों तक बाधित रहा। राहत और बचाव टीमों को मलबा हटाने में लंबा समय लगा, जिसके बाद यातायात दोबारा शुरू किया गया।

पुणे जिले के कुछ इलाकों में अत्यधिक बारिश के कारण पुलों और निचले क्षेत्रों में पानी भर गया, जिससे धार्मिक यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।

हालात को देखते हुए प्रशासन ने कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद रखने, सार्वजनिक पार्कों को बंद करने और निजी कंपनियों को वर्क फ्रॉम होम की सलाह देने जैसे कदम उठाए हैं। तेज हवाओं और जलभराव को देखते हुए लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है।

जहां सरकार ने इसे रिकॉर्ड बारिश और प्राकृतिक आपदा बताया है, वहीं विपक्ष और कई नागरिकों ने जलनिकासी व्यवस्था, सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया पर लोग हर साल मुंबई में होने वाले जलभराव और यातायात संकट को लेकर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।

महाराष्ट्र का यह मॉनसून संकट एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या तेजी से बढ़ते शहरी विकास के साथ आपदा प्रबंधन और इंफ्रास्ट्रक्चर तैयारी भी उतनी ही मजबूत हो पाई है।

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