पंजाब की ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ के तहत 6 महीनों में 914 मरीजों को ₹4.15 करोड़ का कैशलेस स्ट्रोक उपचार

चंडीगढ़, 15 जुलाई 2026: पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत पिछले छह महीनों में 914 स्ट्रोक मरीजों को ₹4.15 करोड़ की लागत से कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया गया है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) के अनुसार, योजना ने स्ट्रोक जैसी गंभीर चिकित्सीय आपात स्थितियों में आर्थिक बाधाओं को कम करते हुए समय पर इलाज सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

स्ट्रोक, जिसे अक्सर ‘ब्रेन अटैक’ कहा जाता है, तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त का प्रवाह रुक जाता है या मस्तिष्क की रक्त वाहिका फट जाती है। ऐसी स्थिति में मस्तिष्क की कोशिकाएं तेजी से क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, इसलिए समय पर उपचार मरीज के जीवन और रिकवरी दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली इसके प्रमुख जोखिम कारक हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) भी समय पर उपचार और जोखिम कारकों के नियंत्रण को स्ट्रोक से होने वाली मृत्यु और विकलांगता कम करने का सबसे प्रभावी उपाय मानते हैं।SHA के आंकड़ों के अनुसार, उपचार किए गए मामलों में एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक के 48 मरीजों पर ₹14.27 लाख का खर्च आया।

रिकॉर्ड बताते हैं कि एक्यूट स्ट्रोक और एक्यूट इस्कीमिक स्ट्रोक के मामलों की संख्या सबसे अधिक रही, जबकि हेमरेजिक स्ट्रोक के मामले कम थे, लेकिन प्रति मरीज उपचार लागत अधिक रही। कुल व्यय का बड़ा हिस्सा सीटी स्कैन, एमआरआई, ट्रेकियोस्टॉमी और रक्त चढ़ाने जैसी उन्नत चिकित्सा सेवाओं पर खर्च हुआ।पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि किसी भी परिवार को आर्थिक चिंता के कारण स्ट्रोक के इलाज में देरी नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सेहत योजना का उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है, क्योंकि स्ट्रोक जैसी आपात स्थितियों में हर मिनट जीवन बचाने के लिए महत्वपूर्ण होता है।

सोबती न्यूरो सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एवं मोहंदाई ओसवाल हॉस्पिटल, लुधियाना के सीनियर कंसलटेंट न्यूरोसर्जन एवं स्पाइन सर्जन डॉ. हरमन सोबती ने कहा कि आधुनिक इमेजिंग, गहन निगरानी और समय पर उपचार से स्ट्रोक मरीजों की रिकवरी में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

उन्होंने लोगों से चेहरे का एक ओर झुकना, शरीर के किसी हिस्से में अचानक कमजोरी या बोलने में कठिनाई जैसे शुरुआती संकेतों को पहचानकर तुरंत अस्पताल पहुंचने की अपील की।विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड प्रेशर और डायबिटीज पर नियंत्रण, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और धूम्रपान से दूरी जैसी स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर स्ट्रोक के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री सेहत योजना जैसी स्वास्थ्य योजनाएं अचानक आने वाली चिकित्सीय आपात स्थितियों में परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो रही हैं।

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